बाबा ताजुद्दीन औलिया की शान में भव्य आम लंगर, सर्वधर्म सद्भाव की मिसाल बने सैकड़ों जायरीन
हनुमान मंदिर के सामने दरगाह परिसर में हुआ आयोजन, शहनाई और सूफियाना कलाम से गूंजा माहौल

गाडरवारा। सूफी संतों की इंसानियत, मोहब्बत और खिदमत की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वीजासेन वार्ड स्थित हजरत सैय्यद बाबा की दरगाह शरीफ के सामने नागपुर के प्रसिद्ध सूफी संत हजरत बाबा ताजुद्दीन औलिया (र.अ.) की शान में भव्य आम लंगर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जायरीन और श्रद्धालुओं ने दरगाह पहुंचकर नियाज-फातेहा में शामिल होकर लंगर का तबर्रुक ग्रहण किया।
यह आयोजन शेख गफ्फार एवं रिजवान खान हिम की ओर से कराया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मगरिब की नमाज के बाद दरगाह शरीफ में नियाज-फातेहा और सलातो-सलाम के साथ हुई। इसके बाद सभी के लिए आम लंगर का शुभारंभ किया गया, जो देर रात तक चलता रहा। आयोजन में हर धर्म, समाज और वर्ग के लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण किया, जिससे सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश दिया गया।
सूफियाना कलाम और शहनाई ने बांधा समां
लंगर के साथ पूरे दरगाह परिसर में सूफियाना माहौल देखने को मिला। जबलपुर से आए शहनाई वादकों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उन्होंने बाबा ताजुद्दीन औलिया की शान में “या ताज के रखना लाज, तेरे दीवाने आए हैं” सहित कई मशहूर सूफियाना कलाम प्रस्तुत किए, जिन्हें सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
सर्वधर्म सद्भावना का दिया संदेश
आयोजकों ने बताया कि बाबा ताजुद्दीन औलिया (र.अ.) का जीवन मानव सेवा, प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। इसी भावना को आगे बढ़ाने के लिए हर वर्ष उर्स की याद में आम लंगर का आयोजन किया जाता है, ताकि जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर सभी लोग एक साथ बैठकर भोजन करें और आपसी प्रेम को मजबूत करें।
युवाओं ने निभाई सेवा की अहम जिम्मेदारी
कार्यक्रम की सबसे खास बात युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही। लंगर की व्यवस्था, साफ-सफाई, पानी पिलाने और जायरीनों की सेवा में युवाओं ने पूरी निष्ठा से जिम्मेदारी निभाई। उपस्थित लोगों ने उनके इस सेवा भाव की सराहना करते हुए कहा कि यदि युवा इसी तरह समाजसेवा और भाईचारे के कार्यों से जुड़े रहें, तो समाज में प्रेम, शांति और सद्भाव और अधिक मजबूत होगा।
अमन और मोहब्बत के माहौल में संपन्न हुआ आयोजन
देर रात तक दरगाह परिसर में जायरीनों की आवाजाही बनी रही। पुरुष, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान अमन, सुकून, भाईचारे और इंसानियत का संदेश गूंजता रहा। आयोजन समिति ने कहा कि भविष्य में भी बाबा ताजुद्दीन औलिया (र.अ.) की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर इसी तरह के सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।







