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ई-अटेंडेंस पर सरकार सख्त: मंत्री बोले- मोबाइल चलाने वाले शिक्षक हाजिरी भी लगा सकते हैं, शिक्षक संगठनों ने जताई आपत्ति

मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मोबाइल चलाने वाले शिक्षक ई-अटेंडेंस भी लगा सकते हैं। शिक्षक संगठनों ने वेतन कटौती के प्रावधान का विरोध किया।

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग में लागू की गई ई-अटेंडेंस (e-Attendance) व्यवस्था को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार इस व्यवस्था को वापस लेने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि आज अधिकांश शिक्षक मोबाइल का उपयोग करते हैं, इसलिए ई-अटेंडेंस दर्ज करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को परेशान करना नहीं, बल्कि विद्यालयों में पारदर्शिता, समयबद्ध उपस्थिति और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि जहां तकनीकी समस्याएं हैं, वहां उनका समाधान भी किया जा रहा है।

नेटवर्क समस्या वाले क्षेत्रों पर सरकार की नजर

स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग एक हजार स्थानों पर नेटवर्क संबंधी समस्याएं सामने आई थीं। इन क्षेत्रों में तकनीकी सुधार के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी कारणों से यदि किसी शिक्षक की ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं हो पाई है, तो उसके आधार पर किसी का वेतन नहीं काटा गया है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि तकनीकी खामी का नुकसान किसी कर्मचारी को न उठाना पड़े।

शिक्षक संगठनों ने जताई आपत्ति

दूसरी ओर, मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था से जुड़े कुछ प्रावधानों पर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ ने स्कूल शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर 1 जुलाई 2026 को जारी आदेश वापस लेने की मांग की है।

शिक्षक संघ का कहना है कि विभाग स्वयं स्वीकार कर चुका है कि प्रदेश के 90 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में ई-अटेंडेंस सफलतापूर्वक दर्ज हो रही है। ऐसे में जहां तकनीकी समस्या है, वहां शिक्षकों के वेतन में कटौती करना या अनुशासनात्मक कार्रवाई करना उचित नहीं होगा।

‘तकनीक का उपयोग हो, लेकिन न्याय भी हो’

ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डी.के. सिंगौर ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए तकनीक का उपयोग स्वागत योग्य है, लेकिन केवल मशीन की रिपोर्ट के आधार पर किसी शिक्षक को अनुपस्थित मान लेना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों को नियमित शिक्षण कार्य के अलावा विभागीय बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम, सर्वेक्षण, परीक्षाएं, निर्वाचन ड्यूटी और अन्य शासकीय कार्यों के लिए भी विद्यालय से बाहर जाना पड़ता है। ऐसे मामलों में लचीलापन रखा जाना चाहिए।

2005-09 पात्रता परीक्षा मामले पर भी सरकार सक्रिय

स्कूल शिक्षा मंत्री ने वर्ष 2005 से 2009 के बीच पात्रता परीक्षा से जुड़े शिक्षकों के मामले पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से राहत की मांग की है।

मंत्री के अनुसार यदि न्यायालय सरकार के पक्ष में निर्णय देता है तो संबंधित शिक्षकों को राहत मिलेगी। यदि ऐसा नहीं होता है तो पात्रता परीक्षा आयोजित करना अनिवार्य होगा।

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