मध्य प्रदेश

नरसिंहपुर के गुड़ और बरमान के भटे को मिला जीआई टैग, किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

नरसिंहपुर के प्रसिद्ध गुड़ और बरमान के भटे को जीआई टैग मिल गया है। इस उपलब्धि से किसानों को बेहतर बाजार, अधिक कीमत और निर्यात के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

नरसिंहपुर। लंबे इंतजार के बाद नरसिंहपुर जिले के दो प्रसिद्ध कृषि उत्पाद गुड़ और बरमान का भटा (बैंगन) को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिल गया है। इस उपलब्धि से जिले के किसानों, उत्पादकों और व्यापारियों में खुशी का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनेगी, निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा।

नर्मदा की धरती ने दी है विशेष पहचान

पुण्य सलिला मां नर्मदा के तट पर बसे नरसिंहपुर जिले की उपजाऊ भूमि, अनुकूल जलवायु और जल संसाधनों ने यहां के कृषि उत्पादों को विशेष गुणवत्ता प्रदान की है। जिले को एशिया की सबसे उपजाऊ कृषि भूमि वाले क्षेत्रों में गिना जाता है।

प्रदेश के कुल गन्ना उत्पादन का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा नरसिंहपुर जिले में होता है। यहां उत्पादित गन्ने में अन्य राज्यों की तुलना में शुगर रिकवरी अधिक होती है। यही कारण है कि जिले में कई शुगर मिलों के साथ-साथ हजारों गुड़ निर्माण इकाइयां भी संचालित होती हैं।

नरसिंहपुर के गुड़ की है अलग पहचान

नरसिंहपुर का गुड़ अपनी गुणवत्ता और पोषण तत्वों के कारण वर्षों से प्रसिद्ध रहा है। इसमें आयरन और कैल्शियम की मात्रा अधिक पाई जाती है, जिससे इसकी मांग प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी रहती है।

जीआई टैग मिलने से अब इस गुड़ को एक विशिष्ट पहचान मिलेगी और इसका उत्पादन तथा विपणन करने वाले किसानों को आर्थिक रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है।

बरमान का भटा स्वाद और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध

नरसिंहपुर के बरमान क्षेत्र में उत्पादित भटा (बैंगन) भी अपनी विशेषताओं के कारण लंबे समय से लोकप्रिय रहा है। नर्मदा की बलुई मिट्टी और क्षेत्र की जलवायु इसे खास बनाती है।

बरमान के भटे की प्रमुख विशेषताएं—

  • स्वाद में प्राकृतिक मिठास
  • बीज लगभग नहीं होते
  • आकार में बड़ा और मुलायम
  • स्वादिष्ट भरता बनाने के लिए सबसे उपयुक्त

इन्हीं विशेषताओं के कारण इसे अब जीआई टैग प्रदान किया गया है।

महाकौशल के अन्य उत्पादों को भी मिला सम्मान

नरसिंहपुर के अलावा महाकौशल क्षेत्र के अन्य उत्पादों को भी जीआई टैग प्राप्त हुआ है।

इनमें प्रमुख हैं—

  • सिवनी का जंबो सीताफल
  • जबलपुर की पौष्टिक हरी मटर
  • डिंडोरी की सिताही कुटकी एवं नागदमन कुटकी
  • कटनी की क्षत्रिय धान
  • कटनी की बैगानी अरहर

वहीं महाकौशल क्षेत्र का प्रसिद्ध सिंघाड़ा भी जीआई टैग मिलने की प्रतीक्षा में है।

मध्यप्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य

एक साथ 12 कृषि उत्पादों को जीआई टैग मिलने के साथ मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश के कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग मजबूत होगी, निर्यात बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाकर 30 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।

क्या होता है जीआई टैग?

जीआई (Geographical Indication) टैग किसी ऐसे उत्पाद को दिया जाता है जिसकी गुणवत्ता, पहचान या विशेषता किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है।

जीआई टैग मिलने के बाद—

  • उत्पाद को कानूनी पहचान मिलती है।
  • दूसरे क्षेत्र के उत्पादक उसी नाम से उत्पाद नहीं बेच सकते।
  • नकली उत्पादों पर रोक लगती है।
  • उत्पाद की बाजार में विश्वसनीयता बढ़ती है।
  • किसानों और उत्पादकों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

भारत में जीआई टैग चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री कार्यालय द्वारा प्रदान किया जाता है।

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