मध्य प्रदेश

सेठानी घाट पर फिर डूबा 16 वर्षीय किशोर, 5 घंटे चला रेस्क्यू लेकिन नहीं बच सकी जान

नर्मदापुरम में लगातार हो रहे हादसों पर फिर उठे सवाल

संवाददाता राकेश पटेल एक्का 

नर्मदापुरम। नर्मदापुरम के प्रसिद्ध सेठानी घाट पर रविवार सुबह एक बार फिर दर्दनाक हादसा हो गया। छिंदवाड़ा जिले से अपने दादा की अस्थियों के विसर्जन के लिए आए परिवार का 16 वर्षीय किशोर नर्मदा नदी में नहाते समय डूब गया। करीब 5 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी किशोर की जान नहीं बचाई जा सकी।

इस घटना ने एक बार फिर घाटों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अस्थि विसर्जन के दौरान हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा से आया परिवार धार्मिक परंपरा के तहत सेठानी घाट पहुंचा था। परिवार के सदस्य पूजा-पाठ और अस्थि विसर्जन में जुटे थे, तभी 16 वर्षीय किशोर नहाने के लिए नदी में उतरा और देखते ही देखते गहरे पानी में चला गया।

कुछ ही देर में घाट पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने मदद के लिए आवाज लगाई, जिसके बाद प्रशासन और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। घंटों तक तलाश अभियान चलता रहा, लेकिन आखिरकार किशोर की जिंदगी नहीं बच सकी।

हर साल दोहराई जा रही हैं ऐसी घटनाएं

नर्मदापुरम में नर्मदा घाटों पर डूबने की घटनाएं अब लगातार सामने आ रही हैं। हर वर्ष गर्मी और धार्मिक आयोजनों के दौरान घाटों पर हादसे होते हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हालात जस के तस नजर आते हैं।

घाटों पर चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा दावों की बात जरूर होती है, लेकिन कई बार मौके पर पर्याप्त निगरानी और सतर्कता दिखाई नहीं देती।

जिले में अलग-अलग तरह की त्रासदियां बनी चिंता

नर्मदापुरम जिले में लगातार अलग-अलग प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं—

  • पिपरिया में आत्महत्या के मामले
  • सोहागपुर में रेलवे ट्रैक हादसे
  • माखननगर में सड़क दुर्घटनाएं और ओवरलोड वाहनों का खतरा
  • नर्मदापुरम में घाटों पर डूबने की घटनाएं
  • इटारसी में बढ़ती चाकूबाजी की वारदातें

इन लगातार घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

“हर बार हादसा, हर बार वही सवाल”

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हर बार चेतावनी दी जाती है, जब हर बार हादसों के बाद चर्चा होती है, तो फिर स्थायी बदलाव आखिर क्यों नहीं दिखता?

रेस्क्यू सिस्टम अक्सर हादसे के बाद सक्रिय होता है, लेकिन क्या हादसे रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं? यही सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

 

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