तीन दिन में अंधे कत्ल का खुलासा: साईंखेड़ा की महिला से प्रेम प्रसंग में युवक की हत्या, शव बोरे में भरकर पुल के नीचे फेंका
नोटबुक पर हस्ताक्षर बने सुराग, रायसेन पुलिस ने महिला समेत तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

बाड़ी, रायसेन। रायसेन जिले की बाड़ी पुलिस ने महज तीन दिन में एक सनसनीखेज अंधे हत्याकांड का खुलासा करते हुए महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों ने युवक की हत्या कर शव को बोरे में भरकर भोपाल-जबलपुर नेशनल हाईवे-45 स्थित पुल के नीचे फेंक दिया था और पहचान मिटाने के लिए शव को जलाने की भी कोशिश की गई थी।
पुल के नीचे बोरे में मिला था युवक का शव
पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 7 मई 2026 को वन विभाग के फॉरेस्ट गार्ड ने सूचना दी थी कि नागिन मोड़ सिरवारा ब्रिज के नीचे एक बोरे में अज्ञात युवक का शव पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही बाड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
मौके पर देखा गया कि शव करीब 6-7 दिन पुराना था। युवक के हाथ-पैर बंधे हुए थे और मुंह पर टेप लगी हुई थी। शव अत्यधिक डिकंपोज अवस्था में था तथा पहचान मिटाने के उद्देश्य से उस पर पेट्रोल डालकर जलाने की भी कोशिश की गई थी।

एक नोटबुक से खुली पूरी गुत्थी
घटनास्थल से पुलिस को सिर्फ एक थैला मिला, जिसमें जूते, कंघा और अन्य सामान रखा था। उसी थैले में एक बच्चे की नोटबुक भी मिली, जिस पर साईंखेड़ा क्षेत्र का नाम लिखा हुआ था।
पुलिस ने इसी छोटे से सुराग के आधार पर साईंखेड़ा पहुंचकर जांच शुरू की। नोटबुक चेक करने वाले शिक्षक तक पहुंचने के बाद पुलिस को संबंधित परिवार की जानकारी मिली। लेकिन जांच के दौरान पता चला कि परिवार के सभी सदस्य कई दिनों से घर से गायब थे।
उज्जैन से पकड़े गए आरोपी
इसके बाद पुलिस ने मुखबिर तंत्र सक्रिय किया और लगातार दबिश दी। अंततः पुलिस ने उज्जैन से एक महिला और दो पुरुष आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि मृतक पप्पू उर्फ वीर जाट निवासी राजस्थान का महिला रीना किरार से प्रेम प्रसंग चल रहा था। महिला के दूसरे प्रेमी अरुण पटेल को यह संबंध पसंद नहीं था। इसी कारण अरुण पटेल ने रीना किरार और उसके पति हरीश किरार के साथ मिलकर युवक की हत्या कर दी।
हत्या के बाद शव को बोरे में भरकर बाड़ी क्षेत्र के पुल के नीचे फेंक दिया गया ताकि पहचान न हो सके और पुलिस तक मामला न पहुंचे।
पुलिस की सूझबूझ से सुलझा ब्लाइंड मर्डर
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीओपी नीलम चौधरी के निर्देशन में थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश तिवारी ने अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया। पुलिस की सतर्कता और बारीकी से की गई जांच के चलते महज एक नोटबुक पर बने हस्ताक्षर के आधार पर आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गए।







