15 साल पुरानी बसों पर चला परिवहन विभाग का बुलडोज़र!
जबलपुर संभाग में 109 बसों के परमिट सस्पेंड, अब सड़क पर दिखीं तो सीधे होगी जप्ती

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
जबलपुर। मध्यप्रदेश में अब खटारा और जर्जर यात्री बसों के दिन पूरे होते नजर आ रहे हैं। में परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 15 साल से अधिक पुरानी 109 यात्री बसों के स्थायी परमिट तत्काल प्रभाव से तीन महीने के लिए निलंबित कर दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद बस ऑपरेटरों में हड़कंप की स्थिति बन गई है।
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) ने साफ चेतावनी दी है —
“नई बस लाओ, नहीं तो परमिट हमेशा के लिए खोने के लिए तैयार रहो।”
यात्रियों की जान से खिलवाड़ अब नहीं चलेगा

यह कार्रवाई मध्यप्रदेश शासन के उस आदेश के बाद की गई है जिसमें 15 वर्ष से अधिक पुराने यात्री वाहनों के संचालन पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए थे। लंबे समय से इन बसों को बदलने के लिए नोटिस और चेतावनियां दी जा रही थीं, लेकिन कई बस संचालकों ने नियमों को गंभीरता से नहीं लिया।
अब परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए सीधे परमिट निलंबन की कार्रवाई कर दी है।
किन जिलों की कितनी बसें कार्रवाई की जद में?

परिवहन विभाग के मुताबिक जबलपुर संभाग में कुल 215 पुराने वाहनों को नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से 109 बस मालिकों ने अब तक नई बसों का प्रतिस्थापन नहीं कराया।
जिलेवार आंकड़े:
- जबलपुर – 38 बसें
- कटनी – 14
- डिंडोरी – 12
- मंडला – 12
- नरसिंहपुर – 9
- छिंदवाड़ा – 9
- सिवनी – 9
- बालाघाट – 6
सड़क पर मिली तो तुरंत होगी जप्ती
परिवहन विभाग ने दो टूक चेतावनी दी है कि निलंबन अवधि के दौरान यदि कोई भी 15 साल पुरानी बस सड़क पर संचालित होती मिली तो उसे मौके पर ही जप्त कर लिया जाएगा।
इतना ही नहीं, संबंधित परमिट को स्थायी रूप से निरस्त करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल — अब तक कौन ले रहा था जिम्मेदारी?
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इतने वर्षों तक यात्रियों की सुरक्षा को जोखिम में क्यों डाला गया?
क्या बस ऑपरेटर सिर्फ मुनाफे के लिए जर्जर वाहनों को सड़कों पर दौड़ाते रहे?
क्या चेतावनियों को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा?
और क्या अब पूरे प्रदेश में पुराने वाहनों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू होने वाला है?
परिवहन विभाग का बड़ा संदेश
जबलपुर संभाग में हुई इस कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार और परिवहन विभाग समझौते के मूड में नहीं हैं। नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन संचालकों के खिलाफ आने वाले समय में और भी सख्त कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
यात्रियों की सुरक्षा, फिटनेस और परिवहन व्यवस्था को लेकर यह कदम प्रदेश में एक बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।







