नर्मदापुरम में म्यूल अकाउंट पर बड़ा एक्शन: साइबर फ्रॉड रोकने पुलिस-बैंकों की संयुक्त रणनीति तैयार
नर्मदापुरम में म्यूल अकाउंट और साइबर फ्रॉड पर रोक के लिए पुलिस और बैंकों की अहम बैठक। संदिग्ध खातों पर कार्रवाई और संयुक्त रणनीति तैयार।

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
नर्मदापुरम। जिले में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) के जरिए हो रही धोखाधड़ी पर रोक लगाने हेतु पुलिस अधीक्षक नर्मदापुरम ने 4 मई 2026 को पुलिस कंट्रोल रूम में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें जिले के 20 प्रमुख बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
क्या होते हैं म्यूल अकाउंट?
बैठक में बताया गया कि म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका उपयोग साइबर अपराधी धोखाधड़ी के पैसे ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। कई बार आम लोग थोड़े पैसों के लालच में अपने खाते अपराधियों को उपलब्ध करा देते हैं, जिससे वे अनजाने में अपराध का हिस्सा बन जाते हैं।
संदिग्ध खातों का डेटा साझा
बैठक से पहले पुलिस द्वारा सभी बैंकों को पिछले 3 महीनों में खुले संदिग्ध म्यूल अकाउंट्स का विस्तृत डेटा उपलब्ध कराया गया था। बैंकों को निर्देश दिए गए कि वे इन खातों से संबंधित:
- केवाईसी (KYC) फॉर्म
- खाता खुलने की तारीख
- अंतिम बैलेंस
- अन्य जरूरी जानकारी
तुरंत पुलिस को उपलब्ध कराएं।
जांच में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा
बैठक में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें:
- खाता सत्यापन में देरी
- ट्रांजेक्शन ट्रैकिंग की कठिनाइयां
- अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जा रही नई तकनीकें
जैसे मुद्दे शामिल रहे।
पुलिस-बैंक समन्वय पर जोर
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है जब बैंक और पुलिस के बीच मजबूत समन्वय हो। बैंकों को निर्देशित किया गया कि वे अपने ग्राहकों को म्यूल अकाउंट के खतरे के बारे में जागरूक करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि से दूर रहने की सलाह दें।
अधिकारी रहे मौजूद
इस बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर सी.एम. कुमार एवं साइबर सेल की टीम सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।







