शिक्षा/नौकरी

बम्हौरी कला में सेवाभिनंदन समारोह: सम्मान, भावनाओं और यादों के बीच दो शिक्षकों को दी गई विदाई

बम्हौरी कला में उच्च श्रेणी शिक्षक पुरुषोत्तम मेहरा और सहायक शिक्षक मदन कुमार पटैल के सम्मान में सेवाभिनंदन समारोह आयोजित, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भावभीनी विदाई दी गई।

बम्हौरी कला। क्षेत्र के शैक्षणिक वातावरण में उस समय भावुक और गौरवपूर्ण माहौल देखने को मिला, जब बम्हौरी कला में कार्यरत उच्च श्रेणी शिक्षक श्री पुरुषोत्तम मेहरा एवं सहायक शिक्षक श्री मदन कुमार पटैल के सम्मान में एक भव्य सेवाभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर शिक्षक-शिक्षिकाओं, अतिथियों एवं परिजनों की गरिमामयी उपस्थिति से भरा रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत मां वीणावादिनी सरस्वती के पूजन के साथ हुई, जिससे पूरे आयोजन में आध्यात्मिक और सकारात्मक वातावरण का संचार हुआ। मंच पर पूर्व प्राचार्य श्रीमती मुमताज खान, सम्मानित शिक्षक श्री पुरुषोत्तम मेहरा, श्री मदन कुमार पटैल, डॉ. दीपिका पटैल, संस्था प्राचार्य श्रीमती ऊषा सिंह एवं श्री नगेंद्र कुमार त्रिपाठी सहित अन्य अतिथि विराजमान रहे।

अतिथियों का भव्य स्वागत

समारोह में उपस्थित अतिथियों का स्वागत बड़े ही आत्मीय अंदाज में किया गया। श्री विश्वनाथ शर्मा, श्री मुन्नालाल राजपूत, श्री अमित कुमार वर्मा, श्रीमती प्रियंका भोंसले, श्रीमती मोहन कोरी एवं श्रीमती हेमलता कोरी ने पुष्पमालाएं एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर अतिथियों का अभिनंदन किया।

वक्ताओं ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम के दौरान पूर्व सहायक प्राध्यापक श्री मानसिंह मेहरा ने श्री पुरुषोत्तम मेहरा के जीवन, उनके शिक्षण कार्य एवं सरल जीवनशैली पर प्रकाश डालते हुए उनके योगदान को याद किया।
इसके बाद श्री नगेंद्र कुमार त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में दोनों शिक्षकों के सहज, सौम्य एवं अनुशासित व्यक्तित्व की सराहना की और उनके साथ बिताए अनुभवों को साझा किया।

पूर्व प्राचार्य श्रीमती मुमताज खान, श्री अरविंद कुमार गुबरेले, श्री विश्वनाथ शर्मा, श्री मुन्नालाल राजपूत एवं श्रीमती शबनम निशा सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त करते हुए दोनों शिक्षकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उनके शिक्षण कार्य को प्रेरणादायक बताया।

अभिनंदन पत्र वाचन एवं विशेष सम्मान

समारोह के दौरान केंद्र के शिक्षकों की ओर से अभिनंदन पत्र का वाचन श्री दुर्गेश सिंह एवं श्री अमित कुमार वर्मा द्वारा किया गया, जिसमें दोनों शिक्षकों के कार्यकाल, उपलब्धियों और उनके योगदान का विस्तार से उल्लेख किया गया।

इसी क्रम में सहायक प्राध्यापक पद पर चयनित होने पर डॉ. दीपिका पटैल को भी बम्हौरी कला के स्टाफ द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे कार्यक्रम में एक और गौरवपूर्ण क्षण जुड़ गया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बनाया यादगार माहौल

कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समा बांध दिया। नंदकिशोर प्रजापति ने “एक प्यार का नगमा है…” गीत प्रस्तुत कर सभी को भावुक कर दिया, वहीं कार्यक्रम का संचालन कर रहे शिक्षक राघवेंद्र चौधरी ने “कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता…” गीत की प्रस्तुति देकर माहौल को और भी भावनात्मक बना दिया।

शॉल-श्रीफल से हुआ सम्मान

समारोह के केंद्र बिंदु रहे दोनों शिक्षकों—श्री पुरुषोत्तम मेहरा एवं श्री मदन कुमार पटैल—को संकुल के सभी शिक्षकों द्वारा शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान उपस्थित सभी लोगों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट से उनका अभिनंदन किया।

संचालन और आभार प्रदर्शन

कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षक राघवेंद्र चौधरी ने कुशलता के साथ किया, जबकि अंत में संस्था प्राचार्य श्रीमती ऊषा सिंह ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

बड़ी संख्या में रही उपस्थिति

इस गरिमामयी आयोजन में विद्यालय एवं संकुल के अनेक शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित परिजनों की उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से दुर्गेश सिंह, प्रियंका भोंसले, मंजू नागवंशी, मोहन कोरी, हेमलता कोरी, शबनम निशा, आरती चौरसिया, आरती यादव, प्रतीक्षा मालवीय, देवेन्द्र ठाकुर, निशांत श्रीवास्तव, नारायण तिवारी, निशांत शर्मा, अक्षिता अवस्थी, शिखा दुबे, संजना नागा, कुंती मेहरा, लक्ष्मीकांत कौरव, राजेन्द्र राजपूत, डालचंद पटैल, मंजीत पटैल, विकल्प जैन, संदीप कुमार खरे, लक्ष्मीकांत मिश्रा, अनिमेष राजपूत, बालकिशन मेहरा, चन्द्रभान गूजर, जगदीश गूजर, जितेंद्र पांडे, जटाशंकर तिवारी, रामस्वरूप, शिवकुमारी चौधरी सहित अनेक लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम को सफल बनाया।

निष्कर्ष

यह सेवाभिनंदन समारोह न केवल दो शिक्षकों की विदाई का अवसर था, बल्कि उनके वर्षों के समर्पण, मेहनत और शिक्षा के प्रति उनके योगदान को सम्मानित करने का एक यादगार पल भी बन गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षक समाज की रीढ़ होते हैं और उनके योगदान को सदैव याद रखा जाता है।

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