मध्य प्रदेशराजनीति

नरसिंहपुर में किसानों का अल्टीमेटम: सड़क और मुआवजा नहीं मिला तो होगा उग्र आंदोलन

नरसिंहपुर में किसानों ने सड़क निर्माण और फसल मुआवजे को लेकर प्रशासन को अल्टीमेटम दिया। 21 अप्रैल से उग्र आंदोलन की चेतावनी, 100 एकड़ गेहूं फसल जलने का मामला।

संवाददाता अवधेश चौकसे

नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश किसान सभा ने जिले में बुनियादी सुविधाओं और फसल नुकसान के मुआवजे को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को अंतिम चेतावनी दी है। संगठन ने साफ कहा है कि यदि जल्द मांगें पूरी नहीं हुईं तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

3 किमी कच्ची सड़क से परेशान 40 परिवार

जिला महासचिव देवेन्द्र वर्मा ने बताया कि बारहा बड़ा ग्राम पंचायत के वार्ड क्रमांक 4 और 5 में करीब 40 परिवार रहते हैं, जहां आजादी के बाद से अब तक पक्की सड़क नहीं बनी।

  • लगभग 3 किलोमीटर कच्चा रास्ता
  • बारिश में दलदल जैसी स्थिति
  • बच्चे घुटनों तक कीचड़ में चलकर स्कूल जाने को मजबूर
  • महिलाओं और किसानों को भारी परेशानी

पहले भी दिया जा चुका है ज्ञापन

इस समस्या को लेकर 7 अप्रैल 2026 को भी ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।

21 अप्रैल से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

किसान सभा ने कलावती व्यारे (एसडीएम) को ज्ञापन देकर चेतावनी दी है कि:

21 अप्रैल से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा
जरूरत पड़ी तो चक्का जाम, आमरण अनशन और पुतला दहन जैसे उग्र आंदोलन किए जाएंगे

आग से नष्ट हुई फसल का मुआवजा भी नहीं मिला

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि:

  • सहावन, आड़ेगांव और पनागर क्षेत्रों में
  • करीब 100 एकड़ गेहूं की खड़ी फसल आग में जलकर नष्ट हो गई

इसके बावजूद:

  • न तो बीमा राशि मिली
  • न ही शासन स्तर पर कोई मुआवजा

मुआवजा नहीं मिला तो होगा उग्र प्रदर्शन

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बीमा और मुआवजा नहीं मिला तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपते समय बारहाबड़ा, सहावन, आड़ेगांव, पनागर के किसानों सहित किसान सभा के वरिष्ठ नेता एडवोकेट एन एस पटेल, किसान सभा के राज्य सहायक महासचिव जगदीश पटेल, करणसिंह अहिरवार जिला सह सचिव, एडवोकेट नरेश चौधरी, एडवोकेट बिक्रम पटेल, आकाश सोनी, संतोष वर्मा, नन्हेलाल वर्मा, यदुराज वर्मा दिनेश कुशवाहा, राजेश कुशवाहा, रामाधार कुशवाहा, हेमंत कुशवाहा, केशर कुशवाहा, कैलाश कुशवाहा, जगदीश कुशवाहा, माखनलाल कुशवाहा, केशव कुशवाहा, प्यारेलाल कुशवाहा, परसोत्तम कुशवाहा, संजय कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल थे।

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