मध्य प्रदेश

सहावन में मनाया गया अखिल भारतीय किसान सभा का 90वां स्थापना दिवस, शहीदों और महापुरुषों को किया नमन

नरसिंहपुर के सहावन में अखिल भारतीय किसान सभा का 90वां स्थापना दिवस मनाया गया, महापुरुषों को श्रद्धांजलि और किसान आंदोलन के इतिहास पर हुई चर्चा।

संवाददाता अवधेश चौकसे

सहावन (नरसिंहपुर): All India Kisan Sabha का 90वां स्थापना दिवस जिले के सहावन में बड़े उत्साह और विचार-विमर्श के साथ मनाया गया। पचामा और बारहा बड़ा इकाई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय कमेटियों के कई साथी उपस्थित रहे।

महापुरुषों को अर्पित की श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान Jyotirao Phule जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए गए। साथ ही B. R. Ambedkar की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया।

इसके अलावा किसान आंदोलन के अमर शहीदों और जिले के प्रमुख किसान नेताओं—डोरीलाल तेहिया, डी.पी. तिवारी और भगवत सिंह उपरारिया को भी श्रद्धांजलि दी गई।

ध्वजारोहण और सभा का आयोजन

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रह्लाद सिंह बेतवार ने की, जबकि हर प्रसाद उपरारिया द्वारा किसान सभा का ध्वज फहराया गया।
इसके बाद सभा आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने किसान सभा के इतिहास, संघर्ष और वर्तमान परिस्थितियों पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने रखा संघर्ष का इतिहास

सभा को संबोधित करते हुए महासचिव देवेंद्र वर्मा, नन्हेलाल वर्मा, भगवानदास पगरवार, नरेंद्र वर्मा, लालसाहब वर्मा एवं राज्य सहायक महासचिव जगदीश पटेल ने कहा कि:

  • किसान सभा 11 अप्रैल 1936 को लखनऊ में स्थापित हुई थी
  • यह संगठन किसानों के संघर्ष और बगावत से जन्मा
  • देशभर में इसके करोड़ों सदस्य हैं

वक्ताओं ने बताया कि किसान सभा का उद्देश्य किसानों और मजदूरों को शोषण से मुक्ति दिलाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना रहा है।

ऐतिहासिक संदर्भों का किया उल्लेख

सभा में बताया गया कि अंग्रेजी शासन के दौरान किसानों और कारीगरों का भारी शोषण हुआ।

  • उद्योग-धंधों को नुकसान पहुंचाया गया
  • बुनकरों और कारीगरों की आजीविका छीनी गई
  • किसानों पर करों का बोझ बढ़ाया गया

वक्ताओं ने ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला देते हुए वर्तमान नीतियों पर भी सवाल उठाए।

किसान आंदोलनों की भूमिका पर चर्चा

सभा में तेलंगाना आंदोलन सहित कई किसान संघर्षों का उल्लेख किया गया, जहां किसानों ने जमींदारों और शोषण के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी।

  • हजारों गांवों में किसानों का नियंत्रण स्थापित हुआ
  • जमीन का वितरण किया गया

वक्ताओं ने हाल के किसान आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि आज भी किसान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

वर्तमान हालात पर चिंता

सभा में यह भी कहा गया कि आज किसानों और मजदूरों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
नीतियों को लेकर असंतोष जताते हुए वक्ताओं ने कहा कि किसान सभा देशभर में इन मुद्दों पर संघर्ष कर रही है।

निष्कर्ष

सहावन में मनाया गया किसान सभा का स्थापना दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों के संघर्ष, इतिहास और एकजुटता का प्रतीक बना। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों के अधिकारों और भविष्य की दिशा पर गंभीर चर्चा की गई।

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