गाडरवारा में सरकारी पुस्तक मेला बना अव्यवस्था का केंद्र: किताबों का टोटा, छूट के दावे खोखले
गाडरवारा में सरकारी पुस्तक मेला अव्यवस्थाओं की भेंट, किताबों की कमी और छूट के दावे फेल, अभिभावकों में भारी नाराजगी।

गाडरवारा/नरसिंहपुर। गाडरवारा में सोमवार को आयोजित सरकारी पुस्तक मेला पूरी तरह अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ता नजर आया। स्कूल शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन में आयोजित इस मेले में व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। दूर-दराज से पहुंचे अभिभावकों को न तो किताबें मिलीं और न ही वह छूट, जिसका दावा प्रशासन द्वारा किया गया था।
किताबों के नाम पर मजाक, सिर्फ कॉपियां बेचने का आरोप
मेले में पहुंचे अभिभावकों ने आरोप लगाया कि यहां किताबों की बजाय सिर्फ कॉपियां बेची जा रही थीं।
कई अभिभावक अपने बच्चों की पूरी किताबें लेने पहुंचे, लेकिन उन्हें अधूरे सेट ही मिल पाए या फिर खाली हाथ लौटना पड़ा।
ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने इसे “सिर्फ दिखावा” करार देते हुए कहा कि प्रशासन ने प्रचार तो बड़े स्तर पर किया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई तैयारी नहीं थी।
छूट का दावा भी फेल, बाजार से महंगा पड़ा मेला
प्रशासन द्वारा 13% छूट का दावा किया गया, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आई।
अभिभावकों का कहना है कि बाजार में पहले से ही 30-35% तक की छूट मिल रही है, ऐसे में मेले का कोई फायदा नहीं दिखा।
कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब बाजार में ज्यादा सस्ता सामान मिल रहा है तो सरकारी मेले की जरूरत ही क्या है?
घंटों लाइन में खड़े रहे लोग, एक काउंटर ने बढ़ाई परेशानी
मेले में केवल एक या सीमित काउंटर होने के कारण भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
लोगों को घंटों तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पूरी किताबें नहीं मिल सकीं।
अभिभावकों ने बताया कि इतनी अव्यवस्था थी कि छोटे बच्चों और महिलाओं को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी।
दूर-दराज से आए लोगों को निराशा
करीब 15 किलोमीटर दूर से आए कुछ अभिभावक ने कहा कि उन्होंने उम्मीद के साथ मेला पहुंचा, लेकिन वहां न तो पर्याप्त किताबें थीं और न ही कोई स्पष्ट व्यवस्था।
उन्होंने इसे समय और पैसे की बर्बादी बताया।
DEO का बचाव, लेकिन सवाल बरकरार
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अनिल कुशवाहा ने सफाई देते हुए कहा कि अचानक भीड़ बढ़ने के कारण अव्यवस्था हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि स्टॉक की कमी न हो, इसके निर्देश दिए गए हैं और लगातार पुस्तकों की आपूर्ति की जा रही है।
हालांकि, अभिभावकों का कहना है कि यह सिर्फ “औपचारिक जवाब” है, जबकि जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।
प्रशासन की तैयारियों पर बड़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
- क्या मेले से पहले सही प्लानिंग नहीं की गई?
- क्या स्टॉक की वास्तविक स्थिति का आकलन नहीं हुआ?
- क्या सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए आयोजन किया गया?
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ सकता है असर
किताबों की कमी और अधूरे सेट के कारण सीधे तौर पर छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा है।
अभिभावकों ने मांग की है कि जल्द से जल्द व्यवस्था सुधारी जाए और सभी छात्रों को पूरी किताबें उपलब्ध कराई जाएं।







