मध्य प्रदेश

दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम पहल, स्वरोजगार योजनाओं पर विशेष बैठक आयोजित

नरसिंहपुर में दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में पीएम विश्वकर्मा, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति और अन्य स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी गई।

नरसिंहपुर। जिले में दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का नेतृत्व सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग की उपसंचालक श्रीमती अंजना त्रिपाठी ने किया। इस दौरान दिव्यांगजनों को रोजगार से जोड़ने और उन्हें स्वरोजगार के माध्यम से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में उद्योग विभाग की प्रतिनिधि श्रीमती सारिका रघुवंशी ने उपस्थित दिव्यांगजनों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि वे इन योजनाओं का लाभ उठाकर स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

सरकारी योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी

बैठक के दौरान दिव्यांगजनों को कई महत्वपूर्ण योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। इनमें पीएम विश्वकर्मा योजना, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए संचालित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्वरोजगार योजना और बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना प्रमुख रूप से शामिल रहीं।

अधिकारियों ने इन योजनाओं में आवेदन करने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और मिलने वाली वित्तीय सहायता के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। साथ ही दिव्यांगजनों को प्रेरित किया गया कि वे इन योजनाओं का लाभ लेकर छोटे उद्योग, स्वरोजगार या व्यवसाय शुरू करें और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाएं।

समिति के आह्वान पर हुआ आयोजन

यह विशेष बैठक अमन सद्भावना शिक्षण प्रशिक्षण कल्याण समिति के आह्वान पर आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में जिले के कई दिव्यांगजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और योजनाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त की।

बड़ी संख्या में सदस्य रहे उपस्थित

बैठक में समिति के कई सदस्य और दिव्यांगजन उपस्थित रहे। इनमें अभय सिंह जाट, दीपाली श्रीवास्तव, नीता महोबिया, कोषाध्यक्ष कमलेश रजक, प्रीति मेहरा, उत्तम पटेल, कुलदीप रजक, सुनील नोरिया, राजकुमार अवस्थी, केशव जाटव, कमलेश चौधरी, पप्पू लोधी और मिथिलेश पटेल सहित कई अन्य लोग शामिल हुए।

कार्यक्रम के अंत में दिव्यांगजनों को आश्वस्त किया गया कि भविष्य में भी ऐसे मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ लेकर आत्मनिर्भर बन सकें।

 

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