बीजादेही बिजली वसूली मामला: ठेकेदारों से लेकर अफसरों तक फैला अवैध नेटवर्क
सरकारी निर्माण कार्य बिना अस्थायी कनेक्शन, मीटर रीडर,लाइनमैन,जेई,एई की भूमिका संदिग्ध

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता
शाहपुर । ग्राम पंचायत बीजादेही क्षेत्र में मीटर रीडर द्वारा की जा रही कथित अवैध वसूली का मामला अब सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके तार सरकारी निर्माण कार्यों और विभागीय अफसरों तक जुड़ते नजर आ रहे हैं। पहले दिन खबर प्रकाशित होने के बाद सामने आई नई जानकारियों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर और बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, बीजादेही एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में कई सरकारी निर्माण कार्य चल रहे हैं, जिनका आवंटन नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया के तहत ठेकेदारों को किया गया है। नियम स्पष्ट हैं कि निर्माण कार्यों के लिए ठेकेदारों को विभाग से अस्थायी बिजली कनेक्शन लेना अनिवार्य होता है, लेकिन हकीकत यह है कि एक भी ठेकेदार ने विभागीय प्रक्रिया के तहत कनेक्शन नहीं लिया।
इसके बावजूद निर्माण कार्यों में धड़ल्ले से बिजली का उपयोग किया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि यह बिजली आपूर्ति मीटर रीडर के माध्यम से अवैध रूप से कराई गई और इसके बदले ठेकेदारों से मोटी रकम वसूली गई। यह सीधे तौर पर शासन के राजस्व के साथ खुला खिलवाड़ है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे खेल में लाइनमैन दीनदयाल पवार की अहम भूमिका रहती है, जो महीनों तक गांवों में दिखाई नहीं देते, लेकिन अवैध कनेक्शन और वसूली के समय पूरी व्यवस्था सक्रिय हो जाती है। सूत्रों ने यह भी संकेत दिए हैं कि इस अवैध वसूली तंत्र में जेई (कनिष्ठ अभियंता) और एई (सहायक अभियंता) स्तर तक की मौन सहमति या प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहभागिता हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना उच्च स्तर की जानकारी और संरक्षण के इतना बड़ा खेल संभव नहीं है। खबर प्रकाशित होने के दूसरे दिन भी न तो किसी अधिकारी की क्षेत्र में मौजूदगी देखी गई और न ही किसी प्रकार की जांच या कार्रवाई की आधिकारिक सूचना सामने आई। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि विभाग मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। ग्रामीणों और किसानों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, मीटर रीडर को तत्काल हटाया जाए और लाइनमैन, जेई एवं एई की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। उनका कहना है कि यदि सरकारी निर्माण कार्यों में अवैध बिजली उपयोग की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल वसूली का नहीं बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस गंभीर मामले पर कब संज्ञान लेंगे। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों का कहना है कि वे इस मुद्दे को जिला एवं राज्य स्तर तक ले जाने से पीछे नहीं हटेंगे।







