क्राइममध्य प्रदेश

शराब माफिया का ज़हर उजागर: सोहागपुर से गुजर रहा था मौत का कारोबार, 11 हजार लीटर से ज्यादा अवैध शराब जब्त

नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर में 11 हजार लीटर से ज्यादा अवैध शराब जब्त, 68 लाख से अधिक का माल, चालक फरार, शराब माफिया के नेटवर्क और सिस्टम की भूमिका पर उठे सवाल।

संवाददाता राकेश पटेल इक्का

सोहागपुर (नर्मदापुरम)।
यह खबर किसी उपलब्धि से अधिक सिस्टम की नाकामी और समाज के लिए खड़े एक गंभीर खतरे की भयावह तस्वीर पेश करती है। थाना सोहागपुर क्षेत्र में पकड़ी गई 11,229.59 लीटर अवैध शराब ने यह साफ कर दिया है कि शराब माफिया बेखौफ हैं और उनका नेटवर्क इतना मजबूत है कि ट्रकों में भरकर ज़हर सड़कों पर उतारा जा रहा है।

सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि अवैध शराब पकड़ी गई, असली सवाल यह है कि इतनी बड़ी खेप आखिर कब से, कहां से और किसकी सरपरस्ती में यहां तक पहुंच रही थी?

मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई

दिनांक 28 दिसंबर 2025 को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने ग्राम करनपुर क्षेत्र में ट्रक क्रमांक UP92T5398 को रोका। तलाशी के दौरान ट्रक से MC DOWELL’S NO.1 CELEBRATION MATURE XXX RUM से भरे सैकड़ों कार्टून बरामद किए गए। जब्त शराब की अनुमानित कीमत 68 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।

यह कोई छोटी-मोटी तस्करी नहीं, बल्कि सड़कों पर चलती पूरी शराब फैक्ट्री जैसा मामला है।

चालक फरार, नेटवर्क पर सवाल

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रक दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद चालक मौके से फरार हो गया। इससे साफ होता है कि शराब माफिया को कानून का कोई भय नहीं है और उन्हें पूरा भरोसा है कि वे बच निकलेंगे।

अब कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं—

  • क्या यह पहली खेप थी?
  • क्या इससे पहले भी इसी रास्ते से अवैध शराब की सप्लाई होती रही है?
  • क्या सिर्फ चालक ही दोषी है या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है?

समाज के खिलाफ खुला अपराध

यदि यह शराब बाजार तक पहुंच जाती, तो सैकड़ों परिवारों की जिंदगी बर्बाद हो सकती थी। यह ज़हर युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलता, अपराध को बढ़ावा देता और गांव-शहर की सामाजिक शांति को तहस-नहस कर देता। यह सिर्फ अवैध शराब की तस्करी नहीं, बल्कि समाज के खिलाफ खुला अपराध था।

कार्रवाई काफी या सिर्फ शुरुआत?

हालांकि पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी चालक की तलाश शुरू कर दी है, लेकिन जनता के मन में यह आशंका गहराती जा रही है कि जब तक पूरे शराब माफिया नेटवर्क को उजागर नहीं किया जाता, तब तक ऐसी कार्रवाइयां अधूरी ही रहेंगी।

केवल एक ट्रक पकड़ लेना काफी नहीं है। असली जरूरत यह जानने की है कि— शराब माफिया की जड़ें कहां तक फैली हैं और उन्हें संरक्षण कौन दे रहा है?

सोहागपुर की यह घटना प्रशासन और समाज—दोनों के लिए एक चेतावनी और आईना है, जिसमें सच्चाई बेहद कड़वी नजर आ रही है।

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