मध्य प्रदेश

रिटायर्ड फौजी पी.एन. अहिरवार के पुत्र की श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा समाज

अहिरवार समाज ने मृत्युभोज व कुरीतियों का किया खुला बहिष्कार, बनी सामाजिक मिसाल

गाडरवारा। गाडरवारा तहसील के अंतर्गत सालीचौका से जुड़े बड़े ग्राम बसुरिया में अहिरवार समाज द्वारा एक अनुकरणीय और समाज-सुधारक पहल देखने को मिली। अहिरवार समाज के पूर्व फौजी एवं रिटायर्ड शिक्षक प्रेमनारायण अहिरवार ने अपने छोटे पुत्र लालसिंह अहिरवार के निधन के उपरांत सामाजिक कुरीतियों को त्यागते हुए एक नई मिसाल पेश की।

श्रद्धांजलि सभा में उमड़ी सामाजिक एकजुटता

बीमारी के कारण लालसिंह अहिरवार का निधन हो गया था। उनके निधन के उपरांत 25 दिसंबर 2025 को ग्राम बसुरिया के हाट बाजार परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
इस श्रद्धांजलि सभा में आसपास के ग्रामों सहित पड़ोसी जिलों से बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित हुए और मृत आत्मा की शांति हेतु श्रद्धा सुमन अर्पित कर परिवार के प्रति अपनी सांत्वना व संवेदनाएं व्यक्त कीं।

रिटायर्ड फौजी

बौद्ध, रविदास और बाबा साहेब के चित्रों पर अर्पित किए पुष्प

श्रद्धांजलि सभा के दौरान तथागत गौतम बुद्ध, संत रविदास, डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं दिवंगत लालसिंह अहिरवार के चित्रों पर पुष्प अर्पित किए गए।
सभा में वक्ताओं ने सामाजिक एकता, नशामुक्ति और कुप्रथाओं के त्याग पर जोर दिया।

मृत्युभोज व कुप्रथाओं से किया पूर्ण बहिष्कार

इस अवसर पर प्रेमनारायण अहिरवार ने बताया कि उन्होंने समाज में प्रचलित मृत्युभोज, गंगाभोज, पगड़ी प्रथा, पोशाक, गुड़-न्योता, चीकट भेंट जैसी तमाम कुरीतियों और अनावश्यक रस्मों को पूरी तरह त्यागने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा कि यह श्रद्धांजलि सभा केवल शोक व्यक्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का एक प्रयास है।

समाज ने दिया सार्थक संदेश

श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में मातृशक्ति, युवा वर्ग, कर्मचारी, अधिकारी, व्यापारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में मृत्युभोज और नशा जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने का आह्वान किया।
समाज ने यह भी निर्णय लिया कि भविष्य में ऐसे सुधारात्मक कार्य करने वाले परिवारों को सम्मानित किया जाएगा।

बनी समाज के लिए प्रेरणास्रोत पहल

अहिरवार परिवार द्वारा की गई यह शुरुआत समाज के लिए अनुकरणीय और प्रेरणादायक मानी जा रही है। सामाजिक कुरीतियों को त्यागकर सादगीपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन आने वाली पीढ़ियों को नई दिशा देने वाला कदम साबित होगा।

 

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