मध्य प्रदेश

सरकारी खाद, मनमाना दाम: किसानों की जेब पर सीधा डाका

₹267 की यूरिया ₹500 में बेची जा रही, लाइसेंसधारी डीलर पर गंभीर आरोप

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता शाहपुर

Fertilizer Black Marketing: शाहपुर क्षेत्र के ग्राम सातलदेही में किसानों के साथ खुलेआम आर्थिक शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। यहां सरकारी दर ₹267 प्रति बोरी में मिलने वाली यूरिया खाद को ₹500 प्रति बोरी तक बेचे जाने का खुलासा हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह अवैध बिक्री किसी गैरकानूनी कारोबारी द्वारा नहीं, बल्कि लाइसेंसधारी खाद डीलर सुरेश यादव द्वारा की जा रही है।

निजी घर से हो रही खाद की बिक्री, गोदाम में मिला भारी स्टॉक

ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद की गई पत्रकारों की तथ्यपरक जांच में सामने आया कि डीलर सुरेश यादव अपने निजी निवास से ही यूरिया की बिक्री कर रहा है।
शुक्रवार को जब पत्रकार ग्राहक बनकर उसके घर पहुंचे, तो डीलर मौके पर मौजूद नहीं था, लेकिन उसके परिजनों ने साफ तौर पर यूरिया की कीमत ₹500 प्रति बोरी बताई।

नकद भुगतान पर खाद देने की सहमति बनी और घर के पीछे बने गोदाम से बोरी उठाने को कहा गया। अंदर जाकर देखा गया कि वहां करीब 90 से 125 बोरी यूरिया का बड़ा स्टॉक रखा हुआ था, जो साफ तौर पर व्यावसायिक बिक्री की ओर इशारा करता है।

सरकारी खाद

वर्षों से महंगे दामों पर खाद बेचने के आरोप

ग्रामीण किसानों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। आरोप है कि संबंधित डीलर वर्षों से एमआरपी की अनदेखी करते हुए महंगे दामों पर खाद बेचता आ रहा है। मजबूरी में किसान उसकी शर्तों पर खाद खरीदने को विवश रहे हैं।

अब किसानों की मांग है कि—

  • डीलर को आवंटित पूरे स्टॉक का मिलान किया जाए
  • बिक्री रजिस्टर और स्टॉक रजिस्टर की गहन जांच हो
  • यह स्पष्ट किया जाए कि किन किसानों को, कब और किस दर पर खाद बेची गई

उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) का खुला उल्लंघन

उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) के तहत—

  • एमआरपी से अधिक दर पर खाद बेचना अपराध है
  • निजी घर या अनधिकृत स्थान से बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है
  • दोषी पाए जाने पर स्टॉक जब्ती, लाइसेंस निलंबन/निरस्तीकरण और एफआईआर का प्रावधान है

इसके बावजूद इतने बड़े स्टॉक और खुलेआम ओवररेट बिक्री पर अब तक कोई त्वरित कार्रवाई न होना कृषि विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े करता है।

कृषि विभाग की चुप्पी पर सवाल

सरकार किसानों को सस्ती और समय पर खाद उपलब्ध कराने की बात करती रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि यूरिया की ओवररेट बिक्री किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस पूरे मामले में कृषि विभाग मौन दर्शक बना हुआ है। सवाल यह उठता है कि—

  • क्या विभागीय निगरानी केवल कागजों तक सीमित है?
  • या फिर शिकायतों के बावजूद आंखें मूंद लेना अब व्यवस्था का हिस्सा बन गया है?

किसानों और ग्रामीणों की प्रशासन से मांग

इस खुलासे के बाद किसानों और पत्रकारों ने प्रशासन से मांग की है कि—

  • मौजूदा स्टॉक तत्काल जब्त किया जाए
  • पूर्व में हुई सभी बिक्री की जांच कराई जाए
  • एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने पर एफआईआर दर्ज हो
  • जिलेभर में खाद विक्रेताओं की विशेष जांच अभियान चलाया जाए

व्यवस्था पर सवाल, किसानों की उम्मीदें दांव पर

यह मामला केवल एक डीलर की मनमानी तक सीमित नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर सवाल है, जिसकी निष्क्रियता के चलते किसान महंगी खाद खरीदने को मजबूर हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस खुलासे पर ठोस कार्रवाई करता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।

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