सालीचौका रेल समस्या: वोट से बनी कुर्सी, ट्रेन के धक्कों में पिसती जनता — शटल और पैसेंजर ट्रेनों की मांग तेज
सालीचौका रेलवे स्टेशन पर शटल और पैसेंजर ट्रेनों के बंद होने से यात्री परेशान। अमरकंटक–अमरावती ट्रेन ठहराव की मांग तेज। पढ़ें पूरी खबर।

संवाददाता अवधेश चौकसे
सालीचौका (नरसिंहपुर)।
सालीचौका क्षेत्र में रेल सुविधाओं को लेकर जनता का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। चुनाव के समय किए गए वादों के बावजूद आज भी सालीचौका रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। शटल और पैसेंजर ट्रेनों के बंद होने के बाद यात्रियों को खटारा मेमो ट्रेनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हो रही है।
ट्रेन में सफर नहीं, रोज़ का संघर्ष बन गया

सालीचौका से रोज़ाना यात्रा करने वाले यात्रियों का कहना है कि
- मरीजों को भीड़भाड़ में खड़े होकर सफर करना पड़ता है
- बुज़ुर्गों और महिलाओं को सीट तक नहीं मिलती
- बच्चों को गंदगी और धक्का-मुक्की के बीच यात्रा करनी पड़ती है
यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आई है।
गरीबों की ट्रेनें बंद, जनता पर बढ़ा बोझ
शटल और पैसेंजर ट्रेनों को आम आदमी की जीवनरेखा माना जाता था। इनके बंद होने से मजदूर, छात्र और छोटे व्यापारियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। यात्रियों का कहना है कि मेमो ट्रेनों की हालत खराब है और समयपालन भी अनिश्चित रहता है।
अमरकंटक–अमरावती ट्रेन ठहराव की भी मांग
स्थानीय नागरिकों द्वारा अमरकंटक–अमरावती ट्रेन का सालीचौका स्टेशन पर ठहराव देने की मांग भी लगातार उठाई जा रही है। लोगों का कहना है कि यह ट्रेन ठहरने से क्षेत्र के मरीजों, छात्रों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिल सकती है।
जनप्रतिनिधियों से जवाब चाहती है जनता
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय रेल सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन जीत के बाद जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया गया। अब क्षेत्र की जनता रेल मंत्रालय और जनप्रतिनिधियों से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रही है।
सालीचौका की मांगें स्पष्ट
- शटल और पैसेंजर ट्रेनों का पुनः संचालन
- अमरकंटक–अमरावती ट्रेन का सालीचौका में ठहराव
- मेमो ट्रेनों की जगह सुविधाजनक यात्री ट्रेनें
- स्टेशन पर मूलभूत यात्री सुविधाओं में सुधार
निष्कर्ष
सालीचौका आज भी रेल न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर समाधान चाहती है। यदि समय रहते रेल सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ, तो यह मुद्दा आने वाले समय में बड़ा जनआंदोलन भी बन सकता है।







