प्रदेश में शिक्षकों का ट्रांसफर और 1881 जनजातीय स्कूल होंगे मर्ज
छात्र संख्या कम होने पर शिक्षकों का युक्तियुक्तीकरण, 3 साल तक नई पोस्टिंग से नहीं हटाए जाएंगे

भोपाल(पूजा मालवीय)। मध्य प्रदेश सरकार पूरे प्रदेश में शिक्षकों के युक्तियुक्तीकरण (Rationalization) की व्यापक प्रक्रिया शुरू कर रही है। जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या कम और शिक्षकों की संख्या अधिक है, वहां से शिक्षकों को दूरस्थ और आवश्यकता वाले स्कूलों में कम से कम 3 वर्ष के लिए भेजा जाएगा। नई पोस्टिंग के बाद शिक्षक तीन वर्षों तक ट्रांसफर या स्थानांतरण के लिए पात्र नहीं होंगे।
यह जानकारी मध्य प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने विधान सभा के प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक अमर सिंह के प्रश्न का जवाब देते हुए दी।
10 से कम छात्रों वाले स्कूल होंगे मर्ज
प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों में 10 से कम छात्र हैं, उन्हें नजदीकी स्कूलों में मर्ज किया जा रहा है, ताकि
- संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके,
- शिक्षकों की उपलब्धता संतुलित रहे,
- और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
जनजातीय विभाग के 1881 स्कूल बंद या मर्ज
कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया द्वारा पूछा गया सवाल के जवाब में जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में जनजातीय कार्य विभाग के कुल 1881 स्कूल बंद या मर्ज किए गए हैं।
जिन जिलों में सबसे अधिक स्कूल मर्ज किए गए:
- खरगोन – 933 स्कूल
- मंडला – 728 स्कूल
मंत्री शाह ने कहा कि इन स्कूलों को छात्रों की कम संख्या और संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से बंद/मर्ज किया गया है।
सरकार का उद्देश्य — शिक्षा व्यवस्था में सुधार
शिक्षा विभाग का कहना है कि युक्तियुक्तीकरण से
- दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी दूर होगी,
- बेहतर स्टाफिंग सिस्टम तैयार होगा,
- और ग्रामीण व जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी।







