खेलमध्य प्रदेश

सोहागपुर का खेल मैदान उजड़ा: राष्ट्रीय खिलाड़ियों के सपने धूल में, एसडीएम प्रियंका भल्लवी ने दिया भरोसा

मैदान की मिट्टी में दबी मेहनत — उजड़ गया खिलाड़ियों का ठिकाना

संवाददाता राकेश पटेल इक्का

सोहागपुरसोचिए, जहां से देश के लिए खिलाड़ी निकलते थे, आज वहां झाड़ियां उग आई हैं।
जहां कभी सुबह की हवा में युवाओं की सांसें गूंजती थीं, अब सन्नाटा पसरा है।

सोहागपुर का सी.एम. राइस खेल मैदान, जो नगर का एकमात्र स्पोर्ट्स हब था, आज सरकारी लापरवाही की कहानी बन चुका है।
यह वही मैदान है, जहां से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकले, शिक्षक बने, सेना में भर्ती हुए, गांव का नाम रोशन किया — लेकिन अब वही लोग अपने ही मैदान से बेघर हो गए हैं।

प्रतिभाओं का मैदान, अब मलबे का मैदान

नगर प्रशासन और निर्माण एजेंसी की अनदेखी ने इस मैदान को खंडहर में बदल दिया है।
ईंट-पत्थरों के बीच कभी राष्ट्रीय खिलाड़ियों की दौड़ हुआ करती थी, आज वहीं कचरा और अव्यवस्था का ढेर लगा है।
रात के समय अवांछित तत्वों का जमावड़ा रहता है, महिलाओं और बालिकाओं के लिए सुरक्षा चिंता का विषय बन चुकी है।

“नेशनल क्लियर हो गया, पर अब अभ्यास करने की जगह नहीं। मेहनत है, सपने हैं — मगर मैदान नहीं।”
— एक खिलाड़ी की आंखों में भरी निराशा।

इन खिलाड़ियों की मेहनत मैदान में नहीं, अब घर की छतों पर दम तोड़ रही है।

सोहागपुर के सितारे — जिन्होंने मैदान से देश तक का सफर तय किया

🏉 भारती राय (राष्ट्रीय खिलाड़ी – रग्बी)
🏉 नंदिनी साराठे (राष्ट्रीय खिलाड़ी – रग्बी)
🏐 आंशली छाबड़िया (खेल शिक्षक – वॉलीबॉल)
जयभानु सिंह चंदेल (फुटबॉल)
शिवम दुबे (स्पोर्ट्स टीचर)
आली साराठे (फुटबॉल)
🏑 कौस्तुव दुबे (हॉकी)
🏑 दर्शन डोंगरे (हॉकी)
🏑 हर्ष डोंगरे (हॉकी)
सूरज कुशवाह (फुटबॉल)
निकीता कुशवाह (स्पोर्ट्स टीचर / फुटबॉल)
विपिन यादव (फुटबॉल)
🎖️ नीलम पटेल (आर्मी)
मेहबूब शेख (फुटबॉल)

इनमें से कई खिलाड़ियों ने प्रदेश, विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय स्तर पर ट्रॉफियां जीती हैं — लेकिन अब अभ्यास की जगह तक नहीं बची।

खेल मैदान उजड़ा, भविष्य बुझा

सोहागपुर का मैदान सिर्फ मिट्टी नहीं था — यह गांव की आत्मा थी।
यहां से बच्चे दौड़ते-दौड़ते फौजी बनते थे, युवतियां मैदान में खेलकर आत्मनिर्भर होती थीं।
अब उस मिट्टी में पत्थर और सरकारी फाइलों का बोझ है।

एनसीसी परेड नहीं हो पा रही, खेल आयोजन बंद हैं, और बच्चों की आंखों में एक ही सवाल —

“क्या हमारा मैदान अब कभी नहीं लौटेगा?”

एसडीएम प्रियंका भल्लवी ने जताई संवेदनशीलता

जब खिलाड़ियों का प्रतिनिधिमंडल मिला, तो एसडीएम प्रियंका भल्लवी ने गंभीरता दिखाते हुए कहा —

“आपके सपने, आपकी मेहनत — सबकी जिम्मेदारी हमारी है।
मैदान को जल्द व्यवस्थित कराया जाएगा।
जरूरत पड़ी तो वैकल्पिक मैदान की भी व्यवस्था करेंगे।
आप हमारे देश का भविष्य हैं।”

उनके यह शब्द खिलाड़ियों के लिए राहत की सांस जैसे थे।
एक अधिकारी का संवेदनशील होना आज की प्रशासनिक दुनिया में उम्मीद की सबसे बड़ी किरण है।

अब भी सवाल बाकी —

  • कब तक खिलाड़ियों के सपने फाइलों में दबे रहेंगे?
  • कब तक आश्वासन और फोटो खिंचवाने से खेल का भविष्य सुधरेगा?
  • कब मैदान फिर से उस मिट्टी की खुशबू देगा, जिसमें मेहनत के पसीने की महक थी?

सोहागपुर का मैदान सिर्फ एक जगह नहीं, एक इतिहास है

यह मैदान उस जुनून की पहचान है, जिसने गांवों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो आने वाली पीढ़ी सिर्फ किताबों में पढ़ेगी —

“कभी सोहागपुर में एक मैदान हुआ करता था, जहां से खिलाड़ी निकले थे…”

 

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