करवा चौथ को लेकर गाडरवारा के बाजारों में बढ़ी रौनक, पूजन सामग्री की दुकानों पर उमड़ रहीं महिलाएं
150 रुपये में उपलब्ध पूजन सामग्री का सेट, आकर्षक छन्नी और सजे हुए करवे महिलाओं को कर रहे आकर्षित

गाडरवारा। करवा चौथ पर्व को लेकर नगर के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। पर्व की तैयारियों के चलते बाजारों में पूजन सामग्री और श्रृंगार की दुकानों पर महिलाओं की चहल-पहल देखने को मिल रही है। नगर के प्रमुख बाजार झंडा चौक, शिवालय चौक, पुरानी गल्ला मंडी, पानी की टंकी और पलोटनगंज सहित विभिन्न स्थानों पर पूजन सामग्री की दुकानें सज गई हैं।
दुकानों पर आकर्षक गोल छन्नियां, मिट्टी के करवे, सजे हुए कलश, पूजा की थालियां, दीपक और श्रृंगार सामग्री उपलब्ध हैं। खासतौर पर कढ़ाई और सुंदर सजावट वाली छन्नियां महिलाओं को आकर्षित कर रही हैं। पर्व को लेकर महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार पूजन सामग्री और अन्य जरूरी सामान की खरीदारी कर रही हैं।
150 रुपये में मिल रही पूजन सामग्री
दुकानदारों के अनुसार, इस बार करवा चौथ की सामान्य पूजन सामग्री का सेट लगभग 150 रुपये में उपलब्ध है। इसमें करवा, छन्नी, दीपक, रोली और चावल सहित जरूरी सामग्री शामिल है। हालांकि, सजावट और गुणवत्ता के आधार पर कीमतों में अंतर हो सकता है। पर्व नजदीक आने के साथ ही बाजारों में खरीदारी का माहौल भी तेज होने लगा है।
29 अक्टूबर को मनाया जाएगा करवा चौथ
इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ यह व्रत रखती हैं।
पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय का समय
उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, करवा चौथ पर चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1:06 बजे प्रारंभ होकर रात 10:09 बजे तक रहेगी। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक बताया गया है, जबकि चंद्रोदय का संभावित समय रात 8:17 बजे है। स्थानीय चंद्रोदय के समय में अंतर संभव है।
चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है व्रत
करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश, माता गौरी, भगवान शिव और माता पार्वती के साथ करवा माता की पूजा-अर्चना कर व्रत कथा सुनी जाती है। रात में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।
करवा चौथ भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पर्व को लेकर बाजारों में बढ़ती चहल-पहल से नगर का माहौल भी उत्सवी नजर आने लगा है।







