मध्य प्रदेश

Narmadapuram News: जनसुनवाई में प्रशासनिक संवेदनहीनता का आरोप, किसान परिवार ने कलेक्ट्रेट में झेली फटकार और अपमान

नर्मदापुरम कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में किसान परिवार को कथित फटकार और धमकी का सामना करना पड़ा। खेत का रास्ता बंद होने से परेशान परिवार कफन लेकर पहुंचा, वरिष्ठ अधिकारियों ने बाद में हस्तक्षेप किया।

संवाददाता राकेश पटेल इक्का

नर्मदापुरम।
नर्मदापुरम कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण मामला सामने आया, जिसने प्रशासनिक संवेदनशीलता और जनसुनवाई की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए। न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचे एक किसान परिवार को कथित तौर पर फटकार, धमकी और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

खेती का रास्ता और पानी निकासी बंद होने का आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार सिवनी मालवा तहसील के ग्राम जीरावेह निवासी दो सगे भाई अपनी वृद्ध माता के साथ जनसुनवाई में पहुंचे थे। परिवार का आरोप है कि उनके खेत से लगी सरकारी भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बना दिए गए, जिससे खेत तक पहुंचने का रास्ता और पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है।

परिवार का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर लंबे समय से तहसील, एसडीएम कार्यालय एवं संबंधित विभागों में शिकायत कर रहे हैं। मामला वर्तमान में अपर कलेक्टर न्यायालय में भी लंबित बताया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।

जनसुनवाई मामला

हताशा में कफन लेकर पहुंचे फरियादी

न्याय न मिलने से अत्यधिक परेशान होकर यह परिवार अर्धनग्न अवस्था में, हाथों में कफन लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचा। फरियादियों का कहना था कि यह कोई दिखावा नहीं, बल्कि प्रशासन की अनदेखी से उपजी उनकी बेबस स्थिति और हताशा का प्रतीक है।

तहसीलदार पर फटकार और धमकी का आरोप

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जनसुनवाई के दौरान नगर तहसीलदार द्वारा फरियादी परिवार को कड़ी फटकार लगाई गई और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की बात कहते हुए पुलिस कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। इससे भयभीत होकर फरियादी युवक और उसकी वृद्ध मां भावुक हो गए और न्याय की गुहार लगाते हुए अधिकारियों के पैरों में गिर पड़े

वृद्ध महिला ने रोते हुए कहा कि वे हर जगह शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही।

वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से स्थिति संभली

घटना की गंभीरता को देखते हुए बाद में वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। फरियादियों को वस्त्र पहनने के लिए कहा गया और उन्हें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) से मिलवाया गया।
सीईओ द्वारा मामले की जांच के लिए जिला स्तरीय टीम गठित करने और तहसील स्तर पर निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।

तहसीलदार का पक्ष

वहीं तहसीलदार की ओर से यह स्पष्टीकरण दिया गया कि कलेक्ट्रेट परिसर में अर्धनग्न प्रदर्शन और आपत्तिजनक भाषा के कारण स्थिति को नियंत्रित करने एवं समझाने के उद्देश्य से सख्त शब्दों का प्रयोग किया गया था।

व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

यह पूरा घटनाक्रम जनसुनवाई की गरिमा, प्रशासनिक संवेदनशीलता और आम नागरिकों के प्रति व्यवहार को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सामाजिक संगठनों और जानकारों का कहना है कि जब कोई नागरिक इस हद तक पहुंच जाता है, तो यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता का संकेत है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जनसुनवाई जैसे मंच पर भी पीड़ित को भय और अपमान का सामना करना पड़े, तो आम नागरिक न्याय के लिए आखिर किस दरवाज़े पर जाए

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