रेत के डंपर ने छीन ली ज़िंदगी: गाडरवारा में फिर उजड़ा घर, शासन-प्रशासन की चुप्पी बनी मौत की वजह
गाडरवारा-चीचली में अवैध रेत डंपर ने फिर एक परिवार उजाड़ दिया। एक की मौत, दूसरा गंभीर। प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल।

गाडरवारा (चीचली)।
गाडरवारा–चीचली क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन अब सिर्फ कानून तोड़ने का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह हर दिन किसी न किसी परिवार के लिए काल बनता जा रहा है। बुधवार को बारहबड़ा मार्ग पर दौड़ रहे एक रेत के डंपर ने फिर साबित कर दिया कि यहां इंसानी जान की कीमत रेत से भी सस्ती हो गई है।
एक पल में हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। एक ज़िंदगी वहीं सड़क पर दम तोड़ गई और दूसरी अस्पताल में मौत से जूझ रही है—और यह सब शासन-प्रशासन की आंखों के सामने।
सड़क पर बिखरा खून, घर में पसरा मातम
ग्राम खैरी निवासी नर्मदा प्रसाद अपने साथी नवल ठाकुर के साथ बाइक से निकले थे। किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। सामने से आ रहे अवैध रेत से लदे डंपर (MP 15 HA 1607) ने उन्हें बेरहमी से रौंद दिया।
टक्कर इतनी भयावह थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए, और नर्मदा प्रसाद की मौके पर ही सांसें थम गईं। वहीं नवल ठाकुर गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जिंदगी की भीख मांग रहा है।
डंपर चालक गाड़ी छोड़कर भाग निकला—जैसे उसे पता हो कि यहां कानून सिर्फ कागजों में जिंदा है।
रेत माफिया बेखौफ, प्रशासन बेबस या मौन?
यह हादसा कोई पहली घटना नहीं है। शक्कर नदी और आसपास के इलाकों में अवैध रेत उत्खनन खुलेआम चल रहा है। दिन-रात ओवरलोड डंपर आबादी वाले क्षेत्रों से 80–100 की रफ्तार से फर्राटा भर रहे हैं।
ग्रामीणों का सवाल सीधा है—
👉 क्या प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं देता?
👉 क्या हर मौत के बाद सिर्फ जांच और आश्वासन ही मिलेगा?
लोगों का आरोप है कि पुलिस और खनिज विभाग की खामोशी ने रेत माफियाओं को बेलगाम बना दिया है। जब तक कोई मरता नहीं, तब तक कोई हरकत नहीं होती।
अस्पताल में फूटा गुस्सा, सिस्टम पर उठे सवाल
जैसे ही हादसे की खबर फैली, सिविल अस्पताल गाडरवारा में भीड़ उमड़ पड़ी। मृतक के परिजन बदहवास थे, आंखों में आंसू और सवाल थे—
“हम किससे न्याय मांगें?”
ग्रामीणों ने प्रशासन पर रेत माफियाओं को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए। लोगों का कहना था कि अगर समय रहते अवैध उत्खनन पर रोक लगाई जाती, तो आज एक घर उजड़ने से बच सकता था।
पुलिस की रस्मी कार्रवाई?
चीचली थाना प्रभारी ने बताया कि डंपर जब्त कर लिया गया है और अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह सब पहले भी हुआ है—डंपर जब्त होते हैं, मामले दर्ज होते हैं और कुछ दिनों बाद फिर वही खेल शुरू हो जाता है।
लोगों की मांग है कि सिर्फ चालक नहीं, बल्कि रेत माफियाओं और उन्हें संरक्षण देने वालों पर भी सख्त कार्रवाई हो, वरना यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।
सवाल जो सिस्टम से टकराते हैं
- क्या हर बार एक लाश गिरने के बाद ही प्रशासन जागेगा?
- क्या रेत का कारोबार इंसानी जिंदगी से ज्यादा कीमती है?
- कब रुकेगा यह मौत का कारोबार?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक गाडरवारा की सड़कों पर दौड़ते रेत के डंपर हर आम आदमी के लिए खौफ का दूसरा नाम बने रहेंगे।







