मध्य प्रदेश

शाहपुर मंडी में सिंडिकेट का खेल, प्रबंधन की मिलीभगत से किसानों की कमर तोड़ रही खरीदी

मंडी में बन गया दलालों का गिरोह, किसानों को तौल से पहले ही लगाया जा रहा चूना अधिकारी तमाशबीन… व्यापारी मनमानी पर उतरे

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता शाहपुर

शाहपुर। शाहपुर कृषि उपज मंडी इन दिनों किसानों के लिए खरीदी केंद्र कम और शोषण का अड्डा ज्यादा बनती जा रही है। मंडी प्रबंधन और कुछ चुनिंदा व्यापारियों की कथित मिलीभगत से तैयार हुआ सिंडिकेट खुलेआम धांधली का खेल खेल रहा है। हालत यह है कि तौल से लेकर गुणवत्ता परीक्षण तक हर जगह किसानों को नुकसान पहुंचाने की रणनीति अपनाई जा रही है। किसानों की मेहनत की फसल की सही कीमत देने के बजाय व्यापारी अपने हिसाब से रेट गिरा रहे हैं, और यह सब अधिकारियों की आंखों के सामने हो रहा है।

स्थानीय किसानों के अनुसार मंडी में सुबह से लेकर देर शाम तक कुछ व्यापारी अपनी टीम के साथ किसानों को तौल की लाइन से हटवाते हैं, फसल की ग्रेडिंग में जानबूझकर कमी निकालते हैं और अंत में औने–पौने दाम पर खरीदी करते हैं। किसान मजबूर होकर अपनी उपज बेचने को तैयार हो जाते हैं, क्योंकि सिंडिकेट उनकी फसल को कई-कई घंटे तक रोके रखता है। मंडी कर्मचारी भी इस खेल में शामिल बताए जा रहे हैं, जो तौल प्रक्रिया को समय पर शुरू नहीं करते और फसल के बोझे को घंटों धूप में पड़े रहने देते हैं।

किसानों का आरोप है कि मंडी अधिकारी भी शिकायत सुनने के बजाय आने-जाने वाले व्यापारियों के साथ खड़े दिखाई देते हैं। किसी किसान की शिकायत पर जांच का आश्वासन तो मिलता है, लेकिन कुछ घंटों बाद वही मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। मंडी के इस वातावरण से छोटे किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जो फसल लेकर मंडी तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन मनमानी रेट और सिंडिकेट की हरकतों के सामने घुटने टेकने को मजबूर हो जाते हैं।

ग्रामीण किसान संगठनों ने इस मामले में जिला प्रशासन से तत्काल जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सिंडिकेट को नहीं रोका गया तो आने वाले दिनों में किसान मंडी पहुंचने से भी कतराने लगेंगे। किसानों ने चेतावनी दी है कि स्थिति नहीं सुधरी तो वे आंदोलन करेंगे और मंडी प्रबंधन के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोलेंगे।

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