रुक्मिणी स्वयं लक्ष्मी का अवतार हैं – आचार्य शिवम दिक्षित

गाडरवारा । श्रीमद्भागवत कथा हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन उनके दिव्य लीलाओं और उनके द्वारा दिए गए उपदेशों का वर्णन है। कथा का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी बहुत गहरा है।
भागवत कथा हमें जीवन के उद्देश्य, धर्म, कर्म, भक्ति और मोक्ष का मार्ग बताती है उक्त उदगार कथा वाचक श्री आचार्य शिवम जी दीक्षित ने कुईया मोहल्ला पटेल वार्ड ओशो आश्रम के पास चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र से हमें एक आदर्श जीवन जीने की सीख मिलती है
कथा सुनने से मन शुद्ध होता है और हृदय में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जीवन की समस्याओं और कष्टों के समाधान के लिए भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए।
उन्होंने आगे बताया कि भागवत कथा में रुक्मिणी विवाह का प्रसंग तब आता है जब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की राजकुमारी रुक्मिणी से विवाह करते हैं। रुक्मिणी ने पहले ही श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था, लेकिन उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था। श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी को हरण कर द्वारका लाया और उनका विवाह संपन्न हुआ।
कहते हैं कि रुक्मिणी स्वयं लक्ष्मी का अवतार हैं और उनका विवाह श्रीकृष्ण से हो गया, क्योंकि वह नारायण से दूर नहीं रह सकती थी विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी ने देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के गुणों और वीरता के बारे में सुनकर उन्हें अपना पति मान लिया था। रुक्मिणी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से श्रीकृष्ण को संदेश भेजा कि वे उन्हें मंदिर से ले जाएं। जब रुक्मिणी पार्वती की पूजा के लिए मंदिर गईं, तो श्रीकृष्ण ने उनका हरण कर लिया कथा पंडाल में धर्म की अमृत वर्षा हो रही है ,भजनों पर भगवान श्री कृष्ण के भक्त आनंद के साथ भक्ति में लीन होकर कथा का श्रवण कर रहे हैं ।
आज 30 अक्टूबर भागवत कथा ज्ञान यज्ञ की पूर्ण आहुति और समापन होगा आयोजन समिति ने धर्म प्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने की अपील की है







