गाडरवारा में ‘पंचलाइट’ ने मोहा दर्शकों का दिल, आशुतोष राणा की प्रेरणा से 30 दिवसीय नाट्य कार्यशाला का समापन
30 दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य कार्यशाला का समापन, बुंदेली लोकजीवन और संस्कृति की जीवंत प्रस्तुति ने जीता दर्शकों का दिल

गाडरवारा। नगर के गौरव, प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता एवं साहित्यकार आशुतोष राणा की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में आयोजित 30 दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य कार्यशाला का भव्य समापन एनटीपीसी ऑडिटोरियम में महान कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु की कालजयी कहानी ‘पंचलाइट’ पर आधारित नाट्य मंचन के साथ हुआ। नाटक की प्रस्तुति ने दर्शकों को ग्रामीण भारत के लोकजीवन से रूबरू कराया और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से प्रशिक्षित पुनीत त्रिवेदी के कुशल निर्देशन में नगर पालिका के विशेष सहयोग से किया गया।
मंच पर दिखा गाडरवारा और बुंदेलखंड का लोकजीवन
‘पंचलाइट’ का मंचन केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, लोकसंस्कृति और सामाजिक सरोकारों का जीवंत दस्तावेज बनकर सामने आया। कलाकारों ने बुंदेली संस्कृति, लोकगायन, पारंपरिक संगीत, कहावतों और ठेठ स्थानीय बोली-बानी के माध्यम से गाडरवारा और आसपास के अंचल के ग्रामीण जीवन की सजीव तस्वीर मंच पर उतार दी।
कहानी में पंचायत द्वारा पेट्रोमैक्स यानी पंचलाइट खरीदने और उसे जलाने को लेकर बुने गए हास्य, व्यंग्य और सामाजिक संबंधों के ताने-बाने को कलाकारों ने बेहद सहजता और प्रभावी अभिनय के साथ प्रस्तुत किया। कई मौकों पर दर्शक स्वयं को कहानी का हिस्सा महसूस करते नजर आए।
मंच पर बनाई गई गांव की चौपाल, ढिबरी की रोशनी, ग्रामीण वेशभूषा और पारंपरिक वातावरण ने पूरे ऑडिटोरियम को ग्रामीण परिवेश में बदल दिया।
30 दिन तक चला कठोर प्रशिक्षण
यह कार्यशाला महज मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि अनुशासन, अभ्यास और रंगमंचीय साधना का संगम बनी। 30 दिनों तक चयनित प्रतिभागियों को रंगमंच की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अभिनय के मूल सिद्धांत, वाणी एवं उच्चारण, शरीर संचालन, भाव-भंगिमा, रंगमंचीय खेल, इम्प्रोवाइजेशन, दृश्य एवं चरित्र निर्माण, मंच प्रस्तुति के साथ-साथ प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि संचालन की बारीकियां सिखाई गईं।
लगातार अभ्यास और प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप प्रतिभागियों की छिपी हुई प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें मंच के लिए तैयार करने का प्रयास किया गया।
‘गाडरवारा साहित्य और संस्कृति की धरती’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष पंडित शिवाकांत मिश्रा ने कहा कि गाडरवारा साहित्य और संस्कृति की धरती है। नगर के गौरव आशुतोष राणा ने अपनी प्रतिभा के माध्यम से इस क्षेत्र का नाम देश-दुनिया में रोशन किया है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की नाट्य कार्यशालाओं से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बेहतर मंच मिलेगा। नगर पालिका भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों में सहयोग करती रहेगी।
रंगकर्मियों ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी
राष्ट्रीय स्तर की इस नाट्य कार्यशाला को सफल बनाने में अनेक लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रंगकर्मी राजू नीखरा, उदय कौरव, मनोज ममार, कपिल साहू और सागर कोरी सहित अन्य सहयोगियों ने आयोजन की व्यवस्थाओं को संभालने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रतिभागियों को दिए प्रमाण पत्र
कार्यशाला के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। आयोजन के सफल समापन के साथ नगर में भविष्य में भी इसी प्रकार के सांस्कृतिक एवं रंगमंचीय आयोजनों को निरंतर आयोजित किए जाने की उम्मीद जताई गई।
कुल मिलाकर ‘पंचलाइट’ का मंचन गाडरवारा की सांस्कृतिक चेतना, बुंदेली लोकजीवन और नई रंगमंचीय प्रतिभाओं का ऐसा संगम रहा, जिसने दर्शकों को लंबे समय तक याद रहने वाली रंगमंच की शाम दी।







