गाडरवारा के चर्चित हरिओम राजपूत हत्याकांड में बड़ा फैसला: दो दोषियों को आजीवन कारावास
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार तिवारी की अदालत ने सुनाया फैसला, दोनों आरोपियों पर अर्थदंड भी लगाया

गाडरवारा। गाडरवारा के बहुचर्चित हरिओम राजपूत हत्याकांड में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश श्री राजेश कुमार तिवारी की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी संजीव उर्फ संजू कौरव निवासी गुनवे एवं दशरथ जाटव निवासी सिंगोटा टोला को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही दोनों आरोपियों पर ₹3,000-₹3,000 का अर्थदंड भी लगाया गया।
खेत पर दूध लेने गए थे हरिओम, देर रात मिली वारदात की सूचना
अभियोजन के अनुसार, मामले की रिपोर्ट मृतक के चचेरे भाई भुवन सिंह राजपूत ने थाना गाडरवारा में दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि हरिओम राजपूत का खेत आचार्य महल के पास पलोहा रोड पर स्थित है और वह प्रतिदिन शाम के समय अपने खेत पर दूध लेने जाया करते थे।
घटना 28 जनवरी 2025 की रात की है। रात करीब 11:30 बजे हरिओम राजपूत की पत्नी और खेत पर काम करने वाले एक व्यक्ति ने भुवन सिंह को सूचना दी कि खेत की बागड़ के पास दो लोग हरिओम के साथ मारपीट कर रहे हैं।
कुएं में मिला हरिओम राजपूत का शव
सूचना मिलते ही भुवन सिंह अपने बेटे और भतीजे के साथ मौके पर पहुंचे। वहां खेत में बने कुएं में झांककर देखा तो हरिओम राजपूत का शव कुएं के अंदर पड़ा मिला। घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को बाहर निकलवाया और पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम कराया।
जांच में सामने आए दोनों आरोपी
थाना गाडरवारा पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर संजीव उर्फ संजू कौरव एवं दशरथ जाटव की भूमिका सामने आई। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।
न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाई उम्रकैद
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य एवं गवाह प्रस्तुत किए। शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने प्रभावी पैरवी करते हुए आरोपियों के विरुद्ध मजबूत पक्ष रखा।
अभियोजन के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों से संतुष्ट होकर प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार तिवारी ने दोनों आरोपियों को हरिओम राजपूत की हत्या का दोषी माना और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोनों पर ₹3,000-₹3,000 का अर्थदंड भी लगाया गया।
अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी
इस चर्चित मामले में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने न्यायालय में पैरवी की। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों और अभियोजन पक्ष के तर्कों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई।
मुख्य बिंदु
- हरिओम राजपूत हत्याकांड में आया फैसला।
- दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा।
- दोनों दोषियों पर ₹3,000-₹3,000 अर्थदंड।
- 28 जनवरी 2025 को हुई थी हत्या।
- प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार तिवारी की अदालत ने सुनाया फैसला।
- शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने पैरवी की।







