आचार्य प्रवर संत तारण तरण मंडलाचार्य महाराज का गुरूपर्वी महा महोत्सव मनाया गया

गाडरवारा।स्थानीय श्री संत तारण तरण दिगम्बर जैन चैत्यालय जी में आचार्य प्रवर संत तारण तरण मण्डलाचार्य महाराज की गुरूपर्वी महा महोत्सव मनाया गया इस अवसर पर श्री मन्दिर जी में मंदिर विधि का आयोजन किया गया। ज्ञातव्य है की सोलहवीं सदी के महान अध्यात्म वादि क्रांतिकारी जैन दर्शन के मर्मज्ञ परमवीतरागी संत श्री गुरु तारण स्वामी हुए, जिन्होंने शुद्धअध्यात्म का शंखनाद किया स्वयं मुक्ति मार्ग के पथिक तारण पंथी हुए, और समस्त जीवो को मुक्ति का मार्ग तारण पंथ बताया। भारतीय संस्कृति में सोलहवीं शताब्दी का समय संतयुग के रूप में जाना जाता है। उस समय देश के हर कोने में संतों का अवतरण हो रहा था मालवा, मध्य प्रदेश में श्री जिन तारण तरण स्वामी जैसे महान सूर्य का उदय हुआ ,मिति अगहन सुदी सप्तमी विक्रम संवत 1505 (ई सन १४४८) में बिलहरी पुष्पावती में हुआ। आचार्य श्री जिन तारण तरण मंडलाचार्य जी महाराज ने धर्म के नाम पर भ्रमित मानवता को यथार्थ राह दिखाकर जीवो के कल्याण का पथ प्रशस्त किया है।
श्री छदमस्त वाणी जी में यह उल्लेख है, कि महावीर स्वामी के समवशरण को आचार्य गुरु ने प्रत्यक्ष देखा व दिव्य ध्वनि सुनी थी तभी उन्हें देशनालब्धि और धर्म का विशेष बहुमान था। इसलिए तारण पंत में कहा गया है की हमें तारण स्वामी द्वारा बताए हुए क्रिया कांड और आडंबर रहित क्रियाकलापों से बचाते हुए उनके बताए हुए मार्ग पर चलकर अपने आत्म कल्याण की भावना को भाना चाहिए।







