हजारों लोग बने विराट हिंदू सम्मेलन के साक्षी, हिंदू गर्जना ऐसी हो कि विधर्मी भी कांप जाए–कैलाश अम्लीयार

झाबुआ-रमेश कुमार सोलंकी
पेटलावद/ झकनावदा–संघ शताब्दी वर्ष पूर्ण होने पर पूरे भारत में जगह-जगह हिंदू सम्मेलन आयोजित किये जा रहे हैं। इसी तारतम्य में आज 18 जनवरी 2026 को विराट हिंदू सम्मेलन हजारों लोगों की उपस्थिति में आयोजित हुआ। जिसमें महिला मंडल द्वारा एक कलश यात्रा बैंड बाजों के साथ गरबा रास करते हुए जय जय सियाराम के गगन भेदी नारो के साथ शनि मंदिर से होते हुए मिस्त्री मोहल्ले में पहुंची जहां पर यात्रा का श्रद्धालुओं द्वारा जगह-जगह पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया। तत्पश्चात कलश यात्रा सदर बाजार से होते हुए सीरवी मोहल्ले में पहुंची जहां पर श्रद्धालु द्वारा पुष्प वर्षा से यात्रा का स्वागत किया गया। उसके बाद यात्रा मधु कन्या नदी के तट पर स्थित महाकाल मंदिर के प्रांगण में पहुंची। यात्रा में हनुमान जी के स्वरूप वाला एक व्यक्ति और दो बंदरों स्वरूप दो व्यक्तियों ने इधर-उधर उछल कुद कर लोगों का मनोरंजन किया जो की आकर्षण का केंद्र रहा।
हिंदू सम्मेलन में आदिवासी संस्कृति का भी रंग दिखा
इस विशाल हिंदू सम्मेलन में आदिवासियों की संस्कृति और सभ्यता का भी असर दिखा। युवाओं ने मांदल की थाप पर थीरखते हुए हुए हुड़दंग करते हुए नृत्य किया। इस आयोजन के लिए 8 मांदलों की व्यवस्था की गई।
बच्चों ने धर्मांतरण पर नाट्य रूपांतरण किया
छोटी-छोटी बालिकाओं , बच्चों ने एक नाट्य रूपांतरण करते हुए समाज को संदेश दिया कि क्रिश्चियन लोग हमारे हिंदू लोगों को लालच लोभ देते हैं। और बीमार होने पर चमत्कार करने का भरोसा देते हुए हम लोगों का धर्मांतरण करवाते हैं। बच्चों ने एक नाटक के अंश में यह बताया कि जब एक बच्चा बीमार हो जाता है, और ओझा के पास जाने पर भी ठीक नहीं होता है, तो उसकी पड़ोसन चर्च में उसे ले जाती है वहां पर उसे फादर पानी पीने को देते हैं, तब वह ठीक हो जाता है। उसके बाद पड़ोस में एक बालिका और बीमार हो जाती है। तब पड़ोसन तब पड़ोसन उसे इसी फादर के पास ले जाती है। उसे भी फादर पानी पीने को देते हैं। और वह ठीक हो जाती है। शंका होने पर उसके बाद उस पानी की लैबोरेट्री जांच करवाई जाती है। तब उसमें पता चलता है कि फादर जो पानी बीमार बच्चों को पीने को देते थे। उसमें दर्द निवारक एलोपैथिक दवाई मिलाई जाती थी। उसके असर से ही बच्चे ठीक होते हैं। ऐसा ही मायाजाल आज हमारे झाबुआ जिले में भी इन लोगों ने फैला रखा। और धर्मांतरण जोरो से चल रहा है। बच्चों ने इस एक उदाहरण से हम हिंदू भाइयों को यह सीख दी है कि आप लोग भी इनके चंगुल में मत आना यह धर्म के नाम पर लोभ, लालच और नौकरी देने की बात करते हैं और बीमारी के नाम पर चमत्कार करने की बात करके धन्मांतरण करवाते हैं।
मां भारती की वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई
विराट हिंदू सम्मेलन की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण कर, दीप प्रज्वलितकर पूजन अर्चन कर की गई। मुख्य अतिथियों का स्वागत पुष्पमालाओं से किया गया।उसके बाद नन्ही नन्ही बालिकाओं द्वारा मां भारती की वंदना की गई।
धर्म के लिए हमारे पूर्वजों ने बहुत बड़े-बड़े बलिदान दिए-महंत रामेश्वर गिरी
गिरी महाराज श्रृंगैश्वर धाम के गादीपति महंत रामेश्वर गिरी महाराज ने अपने हिंदू धर्म पर बल देते हुए कहा कि आज हर इंसान अपने धर्म के लिए अपनी संस्कृति के लिए, अपनी सभ्यता के लिए जी रहा है। और अपने धर्म की रक्षा कर रहा है। पहले मुगलों ने हिंदू धर्म को तोड़ने के लिए बहुत कोशिश की परंतु हमारे जो पूर्वज है उन्होंने इस धर्म की रक्षा के लिए कई बलिदान दिए दिए। हिंदूओ की उत्पत्ति हिंद देश से हुई। वहीं से हिंदू धर्म आज तक विश्व में विद्यमान है। हमारे जो पूर्वज है उन्होंने इसकी रक्षा कर इसे हमें सोंपा है। हमे इसकी हर हाल में रक्षा करना है।
संघ-जनजाति कार्य के प्रांतीय संयोजक कैलाश अमलियार ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिंदू गर्जना इतनी तेज होना चाहिए कि विदेश में बैठे भी विधर्मी भी कांप उठे। बाद में उन्होंने हिंदू धर्म की रक्षा को लेकर लोगों में जोश भरते हुए भारत माता की जय वंदे मातरम के गगनभेदी नारे भी लगवाए। और हिंदुओं से अपील की कि सप्ताह में एक बार हमारे घर में धार्मिक अनुष्ठान होने चाहिए जिससे बच्चों पर संस्कारों को लेकर अच्छा असर दिखेगा। और वह गलत रास्ते पर नहीं जाएंगे। और धर्म के प्रति उनकी आस्था भी बढ़ेगी।
कार्यक्रम का संचालन अरुण बैरागी ने किया। आभार प्रवीण बैरागी ने माना।


बच्चों ने धर्मांतरण पर नाट्य रूपांतरण किया




