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मेरठ ब्लू ड्रम हत्याकांड: मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड, फैसला सुनते ही अदालत में छलके आंसू

13 महीने की सुनवाई, 126 पेशियां और 22 गवाहों की गवाही के बाद अदालत का बड़ा फैसला; मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोनों दोषियों को फांसी की सजा

मेरठ। देशभर में सुर्खियां बटोरने वाले मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोनों को दोषी ठहराए जाने के बाद यह सजा सुनाई।

करीब 13 महीने चली सुनवाई, 126 पेशियों और अभियोजन पक्ष के 22 गवाहों की गवाही के बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर पूरे देश का ध्यान इस जघन्य हत्याकांड की ओर खींचा है। अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा का ऐलान होते ही भावुक हो गए। दोनों के खिलाफ अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और क्रूरता का हवाला देते हुए अधिकतम सजा की मांग की थी।

सजा सुनते ही रो पड़े मुस्कान और साहिल

अदालत में सजा सुनाए जाने के दौरान दोनों दोषियों की प्रतिक्रिया चर्चा का विषय रही। जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला फैसले के बाद फूट-फूटकर रोने लगे।

सजा सुनाने से पहले न्यायाधीश ने मुस्कान से पूछा कि वह सजा के संबंध में कुछ कहना चाहती है या नहीं। इस पर मुस्कान ने अपनी छोटी बच्चियों का हवाला देते हुए उनके भविष्य और देखभाल की चिंता जताई। उसने अदालत से अपनी बच्चियों का ध्यान रखने की बात कही। वहीं, साहिल शुक्ला ने कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं दी और सिर झुकाए रहा।

बचाव पक्ष की ओर से भी सजा कम किए जाने की मांग की गई थी। मुस्कान की दो छोटी बेटियों और परिवार की परिस्थितियों का हवाला देते हुए मृत्युदंड के स्थान पर कम सजा देने की अपील की गई, लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों को मृत्युदंड सुनाया।

क्या है मेरठ का चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड?

यह मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में रहने वाले सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है। सौरभ मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे थे और उनकी हत्या 3 मार्च 2025 को की गई थी। इस मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला पर मिलकर हत्या करने तथा वारदात के साक्ष्य छिपाने का आरोप था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या के बाद सौरभ के शव के टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखकर सीमेंट और बालू की मदद से छिपाने की कोशिश की गई। शव को इस तरह छिपाने के पीछे पहचान और अपराध के साक्ष्य मिटाने की मंशा होने की बात अभियोजन पक्ष ने अदालत में रखी।

जब यह मामला सामने आया, तब शव को ड्रम में छिपाए जाने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया था। मामले की गंभीरता और वारदात के तरीके के कारण इसे देशभर में ब्लू ड्रम हत्याकांड के नाम से जाना जाने लगा।

हत्या के बाद हिमाचल प्रदेश घूमने गए थे दोनों

पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में पेश किए गए तथ्यों के अनुसार, सौरभ की हत्या के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश के शिमला और मनाली गए थे। दोनों की यात्रा से संबंधित होटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को भी मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण माना गया।

जांच में मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और लोकेशन से जुड़े तथ्यों का भी सहारा लिया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इन साक्ष्यों से वारदात के समय साहिल की मौजूदगी और घटना के बाद दोनों की गतिविधियों की कड़ियां जोड़ने में मदद मिली।

मामले का खुलासा मार्च 2025 में हुआ। इसके बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाते हुए दोनों को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान शव छिपाने में इस्तेमाल किए गए ड्रम और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल की गई।

22 गवाहों की गवाही और फोरेंसिक साक्ष्यों ने मजबूत किया अभियोजन का पक्ष

इस चर्चित हत्याकांड में अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में कुल 22 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए गए। मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य, वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्यों पर आधारित था।

अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलों में कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों का उल्लेख किया, जिनमें शामिल थे—

  • गवाहों के बयान: घटना से संबंधित परिस्थितियों और आरोपियों की गतिविधियों के बारे में गवाही।
  • मोबाइल फोन की कॉल डिटेल: घटना के समय और उसके बाद आरोपियों की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी।
  • फोरेंसिक साक्ष्य: बरामद वस्तुओं और अन्य वैज्ञानिक जांच से संबंधित तथ्य।
  • होटल के रिकॉर्ड: शिमला और मनाली की यात्रा तथा वहां ठहरने से जुड़े दस्तावेज।
  • अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य: वारदात के बाद शव छिपाने और घटना से संबंधित कड़ियों को जोड़ने वाले तथ्य।

अभियोजन पक्ष ने अदालत में इन साक्ष्यों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करते हुए तर्क दिया कि परिस्थितियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों की पूरी शृंखला दोनों की संलिप्तता साबित करती है। करीब 13 महीने चली सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार किया।

30 सितंबर को दोषी करार, 14 अक्टूबर को सुनाई गई सजा

इस मामले में अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या तथा साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा की मात्रा पर सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई।

सजा पर बहस के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपराध की प्रकृति, हत्या के तरीके और साक्ष्य छिपाने की कोशिश का हवाला देते हुए इसे दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में माना जाने योग्य बताया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों को अधिकतम सजा दी जानी चाहिए।

दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने मृत्युदंड के बजाय कम सजा देने की मांग की। मुस्कान की बेटियों और पारिवारिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि सजा तय करते समय इन पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 14 अक्टूबर को मृत्युदंड का फैसला सुनाया।

सौरभ की मां ने फैसले पर जताया संतोष

फैसले के बाद सौरभ राजपूत के परिवार ने राहत और संतोष व्यक्त किया। सौरभ की मां रेनू राजपूत ने न्याय मिलने की उम्मीद जताते हुए कहा कि परिवार लंबे समय से इस मामले में कड़ी सजा की मांग कर रहा था।

सौरभ के भाई बबलू ने भी फैसले पर संतोष व्यक्त किया। परिवार के लिए यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि उस बेटे और भाई को खोने का दर्द भी है, जिसकी हत्या ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया था।

मामले की सुनवाई के दौरान सौरभ के परिवार की ओर से दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग लगातार उठाई जाती रही। मृत्युदंड के फैसले के बाद परिवार की प्रतिक्रिया इस बात को दर्शाती है कि वे लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया के निर्णायक पड़ाव का इंतजार कर रहे थे।

मृत्युदंड के बाद भी आगे की कानूनी प्रक्रिया बाकी

अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बावजूद मामला कानूनी रूप से पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के तहत मृत्युदंड के फैसले पर उच्च न्यायालय की पुष्टि आवश्यक होती है। दोषियों को कानून के अनुसार अपील और अन्य उपलब्ध न्यायिक उपायों का अधिकार भी रहता है।

ऐसे मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा फैसले और सजा की समीक्षा की जाती है। इसके बाद परिस्थितियों के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में अपील तथा अन्य संवैधानिक उपायों का रास्ता भी उपलब्ध हो सकता है।

इसलिए मेरठ के ब्लू ड्रम हत्याकांड में 14 अक्टूबर 2026 का फैसला एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव है, लेकिन आगे की कानूनी प्रक्रिया भी इस मामले के अंतिम परिणाम में अहम भूमिका निभाएगी।

देशभर में चर्चा का विषय बना रहा हत्याकांड

सौरभ राजपूत हत्याकांड ने हत्या के तरीके, शव छिपाने की कोशिश और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के कारण देशभर में व्यापक चर्चा पैदा की थी। पति-पत्नी के रिश्ते, विश्वासघात, आपराधिक साजिश और अपराध के साक्ष्य मिटाने के प्रयास जैसे पहलुओं ने इस मामले को लगातार सुर्खियों में बनाए रखा।

अब अदालत द्वारा मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में है। 22 गवाहों की गवाही और लंबी सुनवाई के बाद आया यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया का अहम पड़ाव है। आगे उच्च न्यायालय में होने वाली कार्यवाही पर भी सभी की नजरें रहेंगी।

 

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