ग्राम पंचायत रिछावर के निवासियों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
पंचायत में भ्रष्टाचार की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

गाडरवारा।
ग्राम पंचायत रिछावर (जनपद साईखेडा) के निवासियों ने पंचायत में हो रहे कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विरोध में शुक्रवार को जुलूस की शक्ल में तहसील कार्यालय पहुंचकर अनुविभागीय अधिकारी कलावती ब्यारे को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से पंचायत सरपंच विनय पटेल पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।
मासिक ग्राम सभा न होने का आरोप
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि मार्च 2024 से अब तक पंचायत की मासिक ग्राम सभाओं की बैठक का आयोजन नहीं किया गया। इसके अलावा, सरपंच पंचायत कार्यालय में न रहकर ग्राम अमोदा से कार्य संपादित कर रहे हैं।
परिजनों को लाभ पहुंचाने के आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरपंच ने तकनीकी स्वीकृतियाँ अपनी मर्जी से बनवाकर अपने परिजनों को लाभ पहुँचाया।
- सरपंच के भाई भगवान सिंह के नाम से 2.91 लाख रुपये का खेत तालाब स्वीकृत कर राशि आहरित की गई, जबकि मौके पर तालाब का कार्य नहीं किया गया।
- दूसरे भाई बसंत सिंह के नाम पर भी 2.91 लाख रुपये का तालाब स्वीकृत कर राशि निकाली गई, परंतु कार्य नहीं हुआ।
- माखन और निर्मला गुर्जर को मजदूरी का भुगतान किया गया, जबकि वास्तविक कार्य नहीं कराया गया।
अपूर्ण व फर्जी निर्माण कार्य
ज्ञापन में बताया गया कि पंचायत द्वारा कई निर्माण कार्यों की राशि आहरित की गई, जबकि कार्य अधूरे या फर्जी हैं।
- चबूतरा निर्माण कार्य नौरिया मोहल्ला, भीलट देव और ग्वाल बाबा रिछावर में अपूर्ण पाए गए।
- आंगनवाड़ी और प्राथमिक स्कूल परिसर में बाउंड्रीवाल के नाम पर 1.46 लाख रुपये की राशि निकाली गई, किंतु कार्य नहीं हुआ।
- सार्वजनिक सत्संग भवन के लिए 4.50 लाख रुपये आहरित किए गए, लेकिन ग्रामीणों ने इसे भी फर्जी बताया।
पीएम आवास में भी भ्रष्टाचार का आरोप
ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास मिशन के हितग्राहियों से जबरन राशि वसूलने का भी आरोप लगाया।
संपूर्ण कार्यों की जांच की मांग
ग्रामवासियों ने 1 अप्रैल 2024 से 31 अगस्त 2025 तक 5वें एवं 15वें वित्त, विधायक निधि और मनरेगा से कराए गए सभी कार्यों की जांच की मांग की है, ताकि भ्रष्टाचार उजागर हो सके।
कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि जांच में सरपंच विनय पटेल दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें पद से हटाकर कठोर कार्यवाही की जाए।







