मध्य प्रदेशस्वास्थ्य

जब हकीकत सामने आई: जिला अस्पताल की बदहाल तस्वीर, गंदगी, लापरवाही और जवाबों के इंतज़ार में मरीज

औचक निरीक्षण में उजागर हुई सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कड़वी सच्चाई

संवाददाता राकेश पटेल इक्का

नर्मदापुरम।
कागज़ों में व्यवस्थाएं दुरुस्त, रिपोर्टों में सब कुछ बेहतर—लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां करती है। जिला अस्पताल में हुए औचक निरीक्षण ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। सवाल सीधा है—अगर सब कुछ ठीक होता, तो आम नागरिक मजबूरी में महंगे निजी अस्पतालों का रुख क्यों करता?

निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में फैली गंदगी, अव्यवस्था और लापरवाही साफ दिखाई दी। खुले नाले, जगह-जगह जमा कचरा और मच्छरों का आतंक यह दर्शाने के लिए काफी था कि स्वच्छता केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित रह गई है। इलाज के लिए आए मरीजों को गंदे और असुरक्षित माहौल में रहना पड़ा।

नर्मदापुरम जिला अस्पताल

वार्डों से इमरजेंसी तक अव्यवस्था

अस्पताल के वार्डों में गंदी चादरें, इमरजेंसी यूनिट में अव्यवस्था और बुनियादी साफ-सफाई का अभाव देखने को मिला। कई जगहों पर ऐसा प्रतीत हुआ मानो सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे छोड़ दी गई हो। मरीजों की सुरक्षा और सम्मानजनक इलाज पर यह स्थिति बड़ा सवाल खड़ा करती है।

लॉन्ड्री कक्ष बना लापरवाही की मिसाल

लॉन्ड्री कक्ष में मशीनें खराब और अनुपयोगी हालत में पाई गईं। महीनों से बंद पड़ी मशीनों के कारण वार्डों में साफ बिस्तर उपलब्ध नहीं हो पा रहे। इसका सीधा असर मरीजों के स्वास्थ्य और संक्रमण के खतरे पर पड़ रहा है।

नर्मदापुरम जिला अस्पताल

जर्जर भवन और खुली नालियां

अस्पताल भवन के कई हिस्से जर्जर अवस्था में पाए गए, वहीं खुली नालियां किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकती हैं। दवाइयों की कमी और संसाधनों का अभाव यह बताता है कि योजनाओं और ज़मीनी ज़रूरतों के बीच बड़ा अंतर है। कई मरीजों को मजबूरी में बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं, जिससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

नर्मदापुरम जिला अस्पताल

इलाज में देरी, मरीजों की पीड़ा

सबसे गंभीर स्थिति तब सामने आई जब ऑपरेशन में देरी और इलाज के लिए भटकते मरीजों की शिकायतें उजागर हुईं। एक मरीज की पत्नी की शिकायत ने उस पीड़ा को सामने ला दिया, जिसे न जाने कितने लोग रोज़ झेलते हैं लेकिन आवाज़ नहीं उठा पाते।

बिजली संकट और जवाबदेही पर सवाल

बार-बार बिजली गुल होना, चरमराती व्यवस्थाएं और जिम्मेदारों की अनदेखी यह साबित करती है कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था अभी भी भरोसे के लायक क्यों नहीं बन पाई। सवाल यही है—अगर सरकारी अस्पताल सक्षम होते, तो आम आदमी कर्ज लेकर निजी अस्पताल क्यों जाता?

नर्मदापुरम जिला अस्पताल

यह औचक निरीक्षण सिर्फ एक दिन की कहानी नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही लापरवाही और सिस्टम की कमजोरी का आईना है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और सुधार ज़मीन पर नजर नहीं आएगा, तब तक मरीजों का भरोसा सरकारी अस्पतालों से उठता रहेगा।

नर्मदापुरम जिला अस्पताल

आज भी मरीज यही सवाल पूछ रहा है—
इलाज चाहिए, मगर क्या सरकारी अस्पताल में मिलेगा भी या नहीं?

 

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