सोहागपुर में एसडीओपी संजू चौहान का दूरदर्शी नेतृत्व, पुलिसिंग में उत्कृष्टता की नई परिभाषा
मानवीय संवेदनाओं, सतत मैदान-स्तरीय उपस्थिति और अनुशासित व्यवस्था ने क्षेत्र की सड़क सुरक्षा को बनाया राष्ट्रीय स्तर का उदाहरण

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
सोहागपुर में इन दिनों प्रशासनिक कार्यशैली का एक ऐसा स्वरूप देखने को मिल रहा है, जिसे किसी भी विकसित शहर का मानक कहा जा सकता है। इस बदले हुए वातावरण के केंद्र में हैं एसडीओपी संजू चौहान, जिनकी कार्यप्रणाली, नेतृत्व क्षमता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता ने पुलिसिंग को नई दिशा दी है।
एसडीओपी चौहान का तरीका सामान्य प्रशासनिक रवैये से बिल्कुल अलग है। वे आदेश देने वाले अधिकारी नहीं—बल्कि मैदान में काम करने वाले नेतृत्वकर्ता हैं। भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर उनकी हर घंटे उपस्थिति, हर पॉइंट पर व्यक्तिगत निगरानी और जटिल परिस्थितियों में स्वयं आगे बढ़कर समस्या समाधान करने की क्षमता ने जनता में प्रशासन के प्रति गहरा विश्वास स्थापित किया है।
अक्सर देखा गया है कि यातायात संबंधी समस्याएँ केवल नियमों और दंड से नहीं, बल्कि सहभागिता और संवाद से सुधरती हैं। संजू चौहान इस सिद्धांत पर दृढ़ता से काम करते हैं। वे नागरिकों से सहजता से बातचीत करते हैं, उन्हें नियमों का महत्व समझाते हैं और किसी भी जाम की स्थिति में स्वयं मौके पर पहुँचकर मार्ग साफ कराते हैं—भले वह धूप हो, बारिश हो या रात के घंटे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संजू चौहान के आने के बाद सड़क दुर्घटनाओं की संख्या स्पष्ट रूप से कम हुई है और यातायात अब पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, नियंत्रित और संतुलित है। व्यापारियों और दैनिक यात्रियों ने भी माना है कि चौहान की कार्यशैली ने न सिर्फ ट्रैफिक को आसान बनाया है, बल्कि पूरे वातावरण में अनुशासन और विश्वास का माहौल स्थापित किया है।
पुलिस विभाग में भी उन्हें अत्यधिक सम्मान प्राप्त है—क्योंकि वे केवल वर्दी के अधिकार से नहीं, बल्कि अपने व्यवहार, निर्णयों और नेतृत्व की गुणवत्ता से अपनी जगह बनाते हैं। वे पुलिसकर्मियों के लिए प्रेरणा हैं और नागरिकों के लिए सुरक्षा का आश्वासन।
सोहागपुर के लोग आज यह कहने में गर्व महसूस करते हैं कि उनके क्षेत्र में ऐसे अधिकारी सेवा दे रहे हैं, जिनकी कार्यशैली किसी भी बड़े महानगर के उच्चतम स्तर की पुलिसिंग से कम नहीं है।
निस्संदेह, एसडीओपी संजू चौहान ने यह सिद्ध कर दिया है कि
जब नेतृत्व ईमानदार, सक्रिय और संवेदनशील हो—तो एक शहर की व्यवस्था बदलने में देर नहीं लगती।







