महाराणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय में नशा मुक्ति अभियान के तहत विराट कवि सम्मेलन आयोजित

गाडरवारा, स्थानीय महाराणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गत दिवस नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत एक विराट कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न अंचलों से पधारे कवियों ने अपनी ओजस्वी, प्रेरक एवं सारगर्भित रचनाओं के माध्यम से समाज में बढ़ते नशे के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को इससे दूर रहने एवं जीवन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पी.एस. कौरव ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में गाडरवारा के वरिष्ठ साहित्यकार कुशलेंद्र श्रीवास्तव उपस्थित रहे। कवि सम्मेलन के प्रारंभ के पहले महाविद्यालय परिवार की ओर से डॉ. सुनील शर्मा द्वारा मुख्य अतिथि एवं सभी आमंत्रित कवियों का साल एवं श्रीफल से सम्मान किया गया। कार्यक्रम प्रारंभ में मुख्य अतिथि कुशलेंद्र श्रीवास्तव ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा —
“नशा छोड़िए और समय को सही दिशा दीजिए, सफलता अवश्य मिलेगी।”

कवि सम्मेलन का संचालन एवं संयोजन देश के प्रतिष्ठित मंचों के प्रसिद्ध कवि प्रशांत कौरव एवं डॉ. दर्शन सिंह ने किया गया। मंच पर कवि प्रेम नारायण साहू, पोसराज अकेला, सुनील तन्हा, शिवम संघर्ष एवं बृज बिहारी विराट सहित अन्य कवि उपस्थित रहे और अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
संचालन के दौरान कवि प्रशांत कौरव ने युवाओं में बढ़ते नशे को सबसे गंभीर चुनौती बताते हुए कहा —
“प्रदेश में अनेक समस्याएँ हैं, परंतु युवाओं का तेजी से नशे की ओर झुकाव सबसे बड़ी समस्या बनता जा रहा है। इस दिशा में ठोस कदम उठाना आवश्यक है।” कवि सम्मेलन में सुनील तन्हा द्वारा मधुर स्वर में प्रस्तुत सरस्वती वंदना के। दौरान ऑडिटोरियम में तालियां बजती रही, कवि शिवम संघर्ष प्रस्तुत कविता
“जल पर जल का चित्र नहीं बन सकता है,
कांटों से क्या इत्र कभी बन सकता है।”
कवि बृजबिहारी विराट द्वारापस्तुत कविता
“भंवर में कश्ती की साहिल है बेटियां,
खनकते पांव की पायल है बेटियां।
इन्हें बेटों से कम मत आंकिए जमाने वालो,
कड़कती धूप में मां का आँचल है बेटियां।”
ऑडिटोरियम हॉल में प्रस्तुत उपस्थित छात्रों के मन मस्तिष्क में छा गई,
कार्यक्रम में विशेष रूप से महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. ए.के. जैन, डॉ. ममता सिंह एवं सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ .आर.के. कौरव भी उपस्थित रहे।
कवि सम्मेलसमापन पर आगंतुकों के प्रति आभार डॉ. संदीप श्रीवास्तव ने व्यक्त किया,







