मध्य प्रदेश

बीजादेही पंचायत के ग्रामीणों का आरोप भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी लाखों की रोड

गुणवत्ता पर सवाल, निविदा नियमों की अनदेखी की चर्चा; मामला सामने आने के बाद भी जनपद के अधिकारी मौके से दूर

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता

शाहपुर –आदिवासी बहुल ग्राम बीजादेही में ब्रज के घर से बाजार चौक तक बन रही 200 मीटर लंबी सीसी सड़क अब विवादों के घेरे में आ गई है। पांचवें राज्य वित्त आयोग की 6 लाख 15 हजार रुपये की लागत से बन रहे इस निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता, निविदा प्रक्रिया की अनदेखी और ठेकेदारी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि मामला सामने आने के बाद भी जनपद पंचायत स्तर से किसी अधिकारी ने अब तक मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करना जरूरी नहीं समझा।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में कंक्रीट मिश्रण का अनुपात तय मानकों के अनुसार नहीं रखा जा रहा। उनका कहना है कि सीमेंट की मात्रा कम और रेत-गिट्टी का अनुपात अधिक मिलाया जा रहा है। तकनीकी मानकों के अनुसार सीमेंट, रेत और गिट्टी का संतुलित मिश्रण ही सड़क की मजबूती तय करता है। यदि सीमेंट की मात्रा कम होगी तो सड़क कुछ ही समय में दरारों से भर सकती है और सतह उखड़ने का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों ने सड़क की नींव और किनारों की मजबूती को लेकर भी सवाल उठाए हैं।नियमानुसार ढलाई से पहले बेस को समतल और सघन बनाया जाना चाहिए तथा किनारों की मजबूत वेडिंग तैयार की जानी चाहिए, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इन प्रक्रियाओं में जल्दबाजी और लापरवाही साफ दिखाई दे रही है।

निर्माण स्थल पर अनिवार्य सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। जबकि नियम स्पष्ट हैं कि पंचायत स्तर के किसी भी निर्माण कार्य में योजना का नाम, स्वीकृत राशि, लागत, अवधि और जिम्मेदार तकनीकी अधिकारी का नाम प्रदर्शित करना अनिवार्य होता है। बोर्ड का अभाव भी पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पंचायत द्वारा निर्माण कार्यों में निविदा क्रय नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। उनके अनुसार पंचायत अपने पसंदीदा ठेकेदारों के माध्यम से सामग्री के बिल लगवाती है और सीमेंट, गिट्टी, रेत तथा लोहे के रेट भी मनमाने तरीके से दर्शाए जाते हैं। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि कई बार ठेकेदारों से मनचाहे रेट पर बिल लगवाकर कथित तौर पर कमीशन लिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब सामग्री की खरीदी और बिलों में पारदर्शिता नहीं रहती तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कंक्रीट मिश्रण के नमूनों की प्रयोगशाला जांच, सड़क की मोटाई और बेस की मजबूती का परीक्षण तथा सामग्री खरीदी से जुड़े बिलों की भी जांच की जानी चाहिए।

बीजादेही की यह 200 मीटर लंबी सड़क अब केवल निर्माण कार्य नहीं रह गई है, बल्कि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता, गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल बन चुकी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेते हैं या फिर यह मामला भी कागजों में ही दबकर रह जाएगा।

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