नर्मदा परिक्रमावासियों का गाडरवारा में अभूतपूर्व स्वागत

गाडरवारा। मार्कण्डेय सन्यास आश्रम ओंकारेश्वर के पीठाधीश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में वाहनों से चल रहे नर्मदा परिक्रमावासियों के दल का सोमवार को गाडरवारा नगर में भव्य और आत्मीय स्वागत किया गया। इस पवित्र यात्रा में लगभग 15 संत-महात्माओं की टोली तथा करीब 150 महिला-पुरुष भक्तजन सम्मिलित हैं।
डमरू घाटी में शिव अभिषेक से हुआ शुभारंभ
नगर प्रवेश से पहले परिक्रमावासी भगवान भोलेनाथ की पवित्र स्थली डमरू घाटी पहुँचे, जहाँ स्वामी प्रणवानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में सभी भक्तों ने शिव अभिषेक, पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
डमरू घाटी अध्यक्ष हंसराज मालपानी, सचिव चंद्रकांत शर्मा, प्रथम सेवक केदारनाथ अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने सभी संतों और भक्तों का भावपूर्ण स्वागत कर आगवानी की।
श्री पैलेस में पुष्पवर्षा के साथ स्वागत
इसके पश्चात नर्मदा काफिला श्री पैलेस पहुँचा, जहाँ माहेश्वरी समाज के पदाधिकारियों, महिला-पुरुष मंडलों, युवाओं एवं प्रमुख प्रकाश काबरा सहित समाजजनों ने बैंड-बाजे, पुष्पवर्षा और ‘हर-हर नर्मदे’ के गगनभेदी नारों के साथ भव्य स्वागत किया।
आशीर्वचन कार्यक्रम में संतों का सम्मान
आशीर्वचन कार्यक्रम की प्रथम श्रृंखला में माहेश्वरी समाज, अग्रवाल समाज, बीड़ी उद्यमी नरेंद्र कठल, रमेश साहू, तथा उपस्थित भक्तों ने
पुष्पमाला, तिलक, साल-श्रीफल अर्पित कर
परम पूज्य स्वामी प्रणवानंद जी तथा सहयोगी संत
बाबा जी हतुंडी, अमृतानंद जी, किशोर चैतन्य, रमन चैतन्य
आदि का भावभीना सम्मान किया।
स्वामी प्रणवानंद महाराज के प्रेरक आशीर्वचन
स्वामी प्रणवानंद सरस्वती महाराज ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा—
- मानव जीवन में सत्संग और सद्विचारों का अत्यधिक महत्त्व है।
- अच्छे कार्य और सत्संग व्यक्ति के जीवन को ऊँचाई देते हैं।
- गीता के अध्याय 18 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य जैसे भी परिस्थितियों में हो, नेक कार्य करते हुए सत्संग को जीवन का आधार बनाए।
उन्होंने गाडरवारा में मिले अभूतपूर्व और आत्मीय स्वागत की प्रशंसा करते हुए इसे अविस्मरणीय बताया तथा नगरवासियों को धर्मानुरागी और अतिथि-सेवा में अग्रणी बताया।
संचालन व आभार
कार्यक्रम का संचालन महेश मालपानी ने किया।
आभार इस आयोजन के सूत्रधार रवि गगरानी (भोपाल) ने व्यक्त करते हुए सभी संतों, समाजजन और भक्तों के प्रति साष्टांग वंदन किया।







