दो लाशें, ज़िंदा अपराध और मरी हुई व्यवस्था! नर्मदापुरम में इंसाफ की हत्या—हादसे के चार दिन बाद भी FIR नहीं, पुलिस-प्रशासन की चुप्पी शर्मनाक
नर्मदापुरम के बम्होरी कला सड़क हादसे में दो युवकों की मौत, चार दिन बाद भी FIR दर्ज नहीं। पुलिस-प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल।

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
नर्मदापुरम।
सड़कों पर खून बह गया, घरों में चूल्हे बुझ गए, दो मांओं की गोद सूनी हो गई… लेकिन नर्मदापुरम का सिस्टम अब भी गहरी नींद में है। 14 जनवरी 2026 की शाम नर्मदापुरम–पिपरिया मार्ग पर ग्राम बम्होरी कला के पास हुए भीषण सड़क हादसे में अरविंद पटेल (34) और रामकुमार (23) की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक FIR तक दर्ज नहीं हुई। यह लापरवाही नहीं—यह न्याय की खुली हत्या है।
कार ने कुचला, सिस्टम ने चुप्पी ओढ़ ली
जिस कार MP04 ZG 8559 (स्विफ्ट डिजायर) ने दो जिंदगियां छीनीं, उसका चालक आज भी खुलेआम घूम रहा है। न गिरफ्तारी, न पूछताछ, न गैर इरादतन हत्या की धाराएं। सवाल साफ है—
क्या नर्मदापुरम में आम आदमी की जान की कोई कीमत नहीं?
क्या रसूखदारों के लिए कानून अंधा हो जाता है?
दो घर उजड़े, भविष्य अनाथ हुआ
मृतक दोनों युवक अपने-अपने परिवारों के एकमात्र सहारे थे। आज उनके घरों में सन्नाटा है, बच्चों की आंखों में सवाल हैं और परिजनों के पास सिर्फ आंसू। प्रशासन से उन्हें न तो संवेदना मिली, न न्याय का भरोसा।
न मुआवजे की घोषणा, न जांच की पारदर्शिता—केवल टालमटोल और खामोशी।
शिकायतें दी गईं, कार्रवाई शून्य
पीड़ित पक्ष द्वारा पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी और थाना प्रभारी तक लिखित शिकायतें पहुंचाई जा चुकी हैं। इसके बावजूद कार्रवाई शून्य है।
यह चुप्पी अब मिलीभगत का संदेह पैदा कर रही है। जब कानून के रक्षक ही आंखें मूंद लें, तो अपराधियों के हौसले बुलंद होना तय है।
जनता में उबाल, आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों और गुर्जर समाज में भारी आक्रोश है। स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि तत्काल FIR दर्ज कर आरोपी चालक पर गैर इरादतन हत्या का मामला नहीं बनाया गया और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया, तो जन आंदोलन भड़केगा।
उस स्थिति में हालात बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी पुलिस-प्रशासन की होगी।
यह हादसा नहीं, सिस्टम की नाकामी है
यह सिर्फ सड़क दुर्घटना नहीं—यह व्यवस्था का पोस्टमार्टम है।
अगर दो मौतों के बाद भी सिस्टम नहीं जागता, तो सवाल लाज़मी है—
नर्मदापुरम में कानून ज़िंदा है या सिर्फ फाइलों में दफन?








