अधूरी सड़क पर दौड़ता टोल सिस्टम, और चली गई एक जान!
धार फोदल ढाबे के पास दोहरा हादसा — एंबुलेंस ने ली 58 वर्षीय संतोष की जान, हाईवे प्रबंधन कटघरे में

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता
शाहपुर। अधूरी सड़क, अधूरी पुलिया, अंधेरा और चालू टोल वसूली… इन सबके बीच गुरुवार रात एक बेगुनाह की जान चली गई।
नेशनल हाईवे पर के पास देर रात करीब 2 बजे हुए दोहरे हादसे ने हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था की सच्चाई उजागर कर दी। पहले छिंदवाड़ा से इंदौर जा रही एक प्राइवेट बस ने पुलिया के पास खड़ी पंचर गाड़ी को टक्कर मारी। इसके कुछ ही देर बाद मौके पर पहुंची 1033 एंबुलेंस की चपेट में आने से 58 वर्षीय संतोष प्रजापति (निवासी कोडमा चिचोली) की मौके पर ही मौत हो गई।

पहले बस की टक्कर, फिर एंबुलेंस बनी काल
जानकारी के मुताबिक चार वाहन एक साथ जा रहे थे, जिनमें से एक वाहन धार फोदल ढाबे के पास पंचर हो गया। तीन वाहन आगे निकल गए थे। इसी बीच तेज रफ्तार बस ने पुलिया पार करते समय खड़ी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। बस पुलिया से जा भिड़ी, लेकिन नीचे गिरने से बच गई।
हादसे की सूचना मिलते ही पीछे चल रहे वाहन लौटकर मौके पर पहुंचे। इन्हीं में सवार संतोष प्रजापति भी नीचे उतरकर पंचर वाहन के पास खड़े थे।
तभी पुलिस द्वारा बुलाई गई 1033 एंबुलेंस तेज रफ्तार में मौके पर पहुंची। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि एंबुलेंस चालक नशे की हालत में था। पर्याप्त रोशनी और चेतावनी संकेतक न होने के कारण एंबुलेंस सीधे खड़ी गाड़ी से टकराई और संतोष उसकी चपेट में आ गए। मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।

एंबुलेंस चालक और ईएमटी घायल
टक्कर में एंबुलेंस चालक अमित दायमा और ईएमटी सौरभ चौरे भी घायल हुए। पुलिस ने दोनों को वाहन से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। चालक को कमर में चोट आई है। मामले की जांच जारी है।
अधूरी पुलिया, लेकिन टोल पूरा!
घटना ने एक बार फिर नेशनल हाईवे निर्माण की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पुलिया पर हादसा हुआ, वह अब भी अधूरी है। वहां न पर्याप्त डायवर्जन हैं, न चेतावनी बोर्ड और न ही रिफ्लेक्टर। कई हिस्सों में सड़क निर्माण अधूरा पड़ा है, बावजूद इसके टोल वसूली धड़ल्ले से जारी है।
इसी परियोजना के अंतर्गत संचालित निर्माण पूर्ण हुए बिना ही चालू कर दिया गया।
सवाल साफ है — जब सड़क और पुल सुरक्षित नहीं, तो टोल किस बात का?

जांच जारी, जवाबदेही कब?
पुलिस चौकी प्रभारी नीरज खरे ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है —
क्या अधूरे निर्माण और लापरवाही की कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी होगी?
धार फोदल ढाबे के पास हुआ यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता की कहानी बन गया है।







