मध्य प्रदेश

गाडरवारा: ओशो जन्म महोत्सव पर तीन दिवसीय ध्यान शिविर जारी, देश–विदेश से पहुंचे सन्यासी

ओशो जन्म महोत्सव पर गाडरवारा के ओशो लीला आश्रम में तीन दिवसीय ध्यान शिविर। स्वामी ध्यान आकाश के सानिध्य में देश–विदेश से आए सन्यासियों ने विभिन्न ध्यान विधियों में सहभागिता की।

गाडरवारा। विश्व प्रसिद्ध दार्शनिक एवं आध्यात्मिक गुरु रजनीश ओशो के 11 दिसंबर जन्म महोत्सव को लेकर ओशो लीला आश्रम में तीन दिवसीय ध्यान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर 10 से 12 दिसंबर तक स्वामी ध्यान आकाश के सानिध्य में चल रहा है, जिसमें स्थानीय एवं बाहरी राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी ओशो सन्यासी बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।

विभिन्न ध्यान विधियों का हो रहा अभ्यास

शिविर में प्रतिदिन प्रातः सक्रिय ध्यान, नाद ब्रह्म, विपासना, नृत्य आनंद सहित दिनभर की ध्यान गतिविधियाँ संपन्न हो रही हैं।
शाम 4 से 5 बजे तक कुंडलिनी ध्यान और रात्रि 6:30 से 8 बजे तक व्हाइट रोब ब्रदरहुड संध्या सत्संग, कीर्तन, नृत्य आनंद तथा ओशो प्रवचन माला का रसपान किया जा रहा है।
सन्यासी मौन, साक्षी और आनंद भाव से पूरी साधना में डूबे हुए हैं।

केक काटकर मनाया जाएगा ओशो का जन्मदिन

11 दिसंबर को ओशो जन्म महोत्सव के अवसर पर सन्यासी कुंडलिनी ध्यान के उपरांत केक काटकर ओशो की गगनभेदी जयकारों के साथ जन्म उत्सव मनाएंगे।
ओशो लीला आश्रम के मीडिया प्रभारी स्वामी राजेश नीरस के अनुसार, 11 दिसंबर से 19 जनवरी के बीच देश–विदेश से बड़ी संख्या में सन्यासी आश्रम पहुंचते हैं। यह अवधि ओशो अनुयायियों के लिए आनंद-समागम महोत्सव जैसी मानी जाती है।

ओशो की क्रीड़ास्थली बनी आकर्षण का केंद्र

रजनीश ओशो का जन्म 11 दिसंबर 1931 को रायसेन जिले के कुचवाड़ा में हुआ था। सात वर्ष की आयु में वे अपने माता-पिता के पास गाडरवारा आए, जहाँ उन्होंने

  • प्राथमिक शिक्षा गंज प्राथमिक शाला में,
  • माध्यमिक एवं हायर सेकेंडरी शिक्षा आदर्श स्कूल में प्राप्त की।

इन्हीं वर्षों में उनकी आध्यात्मिक यात्रा का आरंभ हुआ। शक्कर नदी, रामघाट और अन्य स्थानों पर उनकी ध्यान साधना और मृत्यु प्रयोगों ने उन्हें अद्वैत की ओर अग्रसर किया।

आज भी गाडरवारा में ओशो से जुड़े स्थल—ओशो लीला आश्रम, गंज स्कूल, आदर्श स्कूल और शक्कर नदी तट—सन्यासियों के लिए दर्शनीय और प्रेरणास्रोत हैं।
इन दिनों कई शहरों और विदेशी देशों से आए अनुयायी इन स्थलों का भ्रमण कर श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं।

 

 

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