मध्य प्रदेश

ब्रह्मांड घाट में निकला परम पूज्य नर्मदा भक्त दादा गुरुजी महाराज का विशाल काफिला, श्रद्धा से गूंज उठा नर्मदा अंचल

बरमान/नरसिंहपुर। भगवान ब्रह्मा जी की तपोस्थली ब्रह्मांड घाट में 19 जनवरी (सोमवार) शाम लगभग 5:30 बजे उस समय भक्ति और श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा, जब परम पूज्य माँ नर्मदा भक्त दादा गुरुजी महाराज का भव्य आगमन हुआ। माँ नर्मदा जी की भक्ति में लीन, लगभग 1900 दिनों से निराहार केवल माँ नर्मदा जल ग्रहण कर तपस्या कर रहे संत दादा गुरुजी महाराज का पूरे नगरी क्षेत्र में गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

चौथी नर्मदा परिक्रमा पर निकले 1200 से अधिक साधक

बरमान घाट से पत्रकार जिवेश चौरसिया द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, परम पूज्य संत दादा गुरुजी महाराज माँ नर्मदा जी की चौथी परिक्रमा पर निकले हुए हैं। इस परिक्रमा में लगभग 1200 संत, साधक एवं नर्मदा भक्तों का विशाल काफिला शामिल है।
यह परिक्रमा केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, घाटों की स्वच्छता एवं नर्मदा क्षेत्र को गंदगी मुक्त बनाने के संकल्प के साथ की जा रही है।

माँ नर्मदा आरती में दिया सामाजिक संदेश

माँ नर्मदा जी की महाआरती के दौरान परम पूज्य दादा गुरुजी महाराज ने भक्तों को संदेश देते हुए कहा कि

“माँ नर्मदा जीवनदायिनी हैं। जो सौभाग्यशाली इस नर्मदा अंचल में रहते हैं, उनका दायित्व है कि वे माँ नर्मदा के घाटों को पवित्र, स्वच्छ और संस्कारित रखें तथा अच्छे संस्कार व शिक्षा के माध्यम से समाज को आगे बढ़ाएँ।”

उन्होंने समस्त भक्तों पर माँ नर्मदा की कृपा एवं आशीर्वाद बनाए रहने की कामना की। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

गुर्सी घाट में सत्संग, केर पानी में रात्रि विश्राम

19 जनवरी को परम पूज्य संत दादा गुरुजी महाराज का रात्रि विश्राम ब्रह्मांड घाट पर रहा।
20 जनवरी को प्रातः 7 बजे से पूजा-अर्चन, आध्यात्मिक संदेश एवं माँ नर्मदा की महाआरती संपन्न हुई। इसके बाद प्रातः लगभग 8 बजे रानी कोठी विश्राम स्थल से काफिला आगे बढ़ा।

काफिला रेस्ट हाउस, मेला पुल, खेड़ापति मड़िया, नर्मदा धर्मशाला, भारत भारती संस्था, शिव शक्ति चौराहा, नर्मदा चौराहा, पुलिस चौकी होते हुए ब्रिज के नीचे से निकलकर मिढली-हिरणपुर मार्ग से गुर्सी घाट पहुँचा।
गुर्सी घाट में दुपहरी विश्राम एवं सत्संग उपरांत काफिला केर पानी की ओर रवाना हुआ, जहाँ 20 जनवरी को प्रवास रहा।
समाचार लिखे जाने तक 21 जनवरी को परिक्रमा आगे की ओर निरंतर जारी थी।

यह सम्पूर्ण धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन परम पूज्य संत दादा गुरुजी महाराज के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हो रहा है।

 

 

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