दो माह से राशन को तरस रहा परिवार, अंगूठा लगवाकर हड़प लिया 35 किलो अनाज!
सालीचौका के पोड़ार चौराहा निवासी ललता बंशकार ने लगाए गंभीर आरोप

संवाददाता अवधेश चौकसे
सालीचौका (नरसिंहपुर)। गरीब परिवारों के हक का राशन अगर व्यवस्था ही डकार जाए तो सवाल उठना लाजिमी है। पोड़ार चौराहा निवासी ललता प्रसाद बंशकार ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले दो महीनों से सरकारी राशन नहीं मिला। राशन वितरणकर्ता द्वारा फर्जी तरीके से अंगूठा लगवाकर 35 किलो अनाज का हक छीन लेने का मामला सामने आया है।
पीड़ित के अनुसार, सालीचौका की शासकीय उचित मूल्य दुकान पर राशन वितरण का कार्य राकेश शर्मा नामक युवक करता है। आरोप है कि पिछले महीने 35 किलो राशन के नाम पर उनसे अंगूठा लगवा लिया गया और कहा गया कि “नगद राशि या राशन दे दिया जाएगा।” लेकिन न तो अनाज मिला और न ही कोई भुगतान।
राशन मांगने पर जातिगत अपमान का आरोप
पीड़ित ने बताया कि जब उन्होंने दोबारा राशन की मांग की, तो उन्हें टाल दिया गया। इतना ही नहीं, आरोप है कि वितरणकर्ता ने जातिगत गाली-गलौज करते हुए कहा—“जहां जाना है, जाकर शिकायत कर दो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”
यदि ये आरोप सही हैं तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति के साथ गंभीर दुर्व्यवहार और कानूनन दंडनीय अपराध है।
परिवार भूख और बेबसी से जूझ रहा
दो माह से राशन न मिलने के कारण परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है। पीड़ित ने अपनी व्यथा मीडिया के सामने रखी और स्थानीय वार्ड पार्षद गणेश शर्मा को भी मामले से अवगत कराया। पार्षद ने समस्या समाधान का आश्वासन तो दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शाखा प्रबंधक को सौंपा लिखित आवेदन
न्याय की आस में पीड़ित ने शाखा प्रबंधक के नाम लिखित आवेदन भी प्रस्तुत किया है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन गरीब के हक का राशन दिला पाएगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
बड़ा सवाल
- क्या सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है?
- क्या गरीबों का राशन डिजिटल एंट्री के नाम पर कागजों में बांटा जा रहा है?
- क्या जातिगत अपमान के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी जरूरतमंद का हक न छीना जाए।







