सागौन कटाई विवाद: राजस्व हरकत में, वन विभाग अब भी नदारद, जांच पर उठे गंभीर सवाल
तहसीलदार के जांच आदेश के बाद पटवारी मौके पर जाएगा, पर वन अमले का एक भी कर्मचारी नहीं पहुंचा

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता
शाहपुर। भौंरा से गुरुगुंदा, कुसमेरी और बांका होते हुए शाहपुर तक बिछाई जा रही 33 केवी विद्युत लाइन के दौरान सामने आए सागौन कटाई विवाद में जहां राजस्व विभाग ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं, वहीं वन विभाग की निष्क्रियता अब और ज्यादा सवालों के घेरे में आ गई है। स्थिति यह है कि मामले को कई दिन बीत जाने के बावजूद वन विभाग का अब तक एक भी कर्मचारी मौके पर निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचा है, जबकि क्षेत्र वन विभाग के वन विभाग सारणी परिक्षेत्र के अंतर्गत आता है। राजस्व विभाग की ओर से तहसीलदार टी. विश्क ने पेड़ कटाई की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पटवारी को मौके पर जाकर स्थल जांच करने और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। तहसीलदार का कहना है कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। राजस्व के इस कदम से यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर अब जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
इसके विपरीत, वन विभाग की भूमिका पर लगातार सवाल गहराते जा रहे हैं। मौके पर आज भी कटे सागौन के ठूंठ, टूटी लकड़ी और शाखाएं सड़क किनारे पड़ी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो बीट गार्ड पहुंचा, न डिप्टी रेंजर और न ही किसी वरिष्ठ वन अधिकारी ने स्थल निरीक्षण किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पेड़ कटाई की सूचना वन विभाग को पहले ही दी जा चुकी थी, फिर भी विभाग का मौके से दूर रहना समझ से परे है।

मामले की शुरुआत ग्राम बांकाखोदरी निवासी किसान द्वारा अपने निजी खेत खसरा नंबर 350 में 11 सागौन पेड़ कटे होने की शिकायत से हुई थी। इसके बाद लाइन मार्ग के अन्य हिस्सों में भी पेड़ कटाई के संकेत दिखे, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि मामला केवल एक खेत तक सीमित नहीं हो सकता। ऐसे में वन विभाग द्वारा मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट न करना विभागीय जिम्मेदारी से बचने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
नियम स्पष्ट हैं कि सागौन संरक्षित वृक्ष है और चाहे भूमि निजी हो, राजस्व की हो या शासकीय अथवा वन क्षेत्र की—पूर्व अनुमति के बिना कटाई दंडनीय अपराध है। वन परिक्षेत्र में बिना अनुमति कटाई या भारी छंटाई की जिम्मेदारी तय करना सीधे तौर पर वन विभाग का दायित्व है। इसके बावजूद विभाग का अब तक मौके पर न पहुंचना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर कर रहा है।
अब जबकि राजस्व विभाग ने जांच शुरू कर दी है, सवाल यही है कि वन विभाग कब जिम्मेदारी निभाते हुए मौके पर पहुंचेगा और क्या कटे सागौन के मामले में अपनी भूमिका स्पष्ट करेगा। फिलहाल, राजस्व की कार्रवाई और वन विभाग की चुप्पी के बीच यह मामला और ज्यादा गंभीर होता जा रहा है।







