Sohagpur News: नशे में बस चालक की गुंडागर्दी, यात्री घायल
सोहागपुर में प्रशासन पूरी तरह फेल, सड़कों पर मौत का खुला लाइसेंस, नशे में बसें, यात्रियों से मारपीट, फरार चालक—हादसों के बाद भी नहीं जागा सिस्टम

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
सोहागपुर।
सोहागपुर की सड़कों पर अब न कानून बचा है, न डर—यहां अराजकता खुलेआम दौड़ रही है। शोभापुर में रामलीला मंदिर के सामने हुई ताज़ा घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिवहरे बस सर्विस की एक यात्री बस का चालक नशे की हालत में बस दौड़ाता रहा। जब यात्रियों ने जान जोखिम में देख विरोध किया, तो चालक और कंडक्टर ने यात्रियों से मारपीट शुरू कर दी।
नशे में ड्राइविंग, विरोध पर हिंसा
घटना के दौरान पिपरिया निवासी एक यात्री गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा। बस में अफरा-तफरी मच गई, चीख-पुकार के बीच बस का कांच टूट गया। लेकिन असली सवाल कांच टूटने का नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक लापरवाही का है जिसने इस हालात को जन्म दिया।
दोषी फरार, पुलिस देर से मौके पर
मारपीट और हंगामे के बाद चालक-कंडक्टर मौके से फरार हो गए। सूचना के बाद पुलिस पहुंची, लेकिन तब तक हालात काबू से बाहर हो चुके थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो बड़ा हादसा टल सकता था।
पहले भी हो चुके हैं हादसे, फिर भी कोई सबक नहीं
यह पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले ही क्षेत्र में बस पलटने की घटना हुई थी, जिसमें कई यात्रियों की जान बाल-बाल बची। बावजूद इसके न तो परिवहन विभाग ने बसों की सख्त जांच की, न ही नशे में वाहन चलाने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई।
प्रशासन की चेकिंग केवल कागजों और औपचारिकताओं तक सीमित है।
कब जागेगा सिस्टम?
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि प्रशासन हर बार तब जागता है, जब नुकसान हो चुका होता है।
आज एक घायल है—कल लाशें होंगी, और तब भी वही बयान आएंगे:
“जांच के आदेश दे दिए गए हैं।”
जनता में आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही नशे में वाहन चलाने वालों, बस संचालकों और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन तय है।
अब सवाल साफ है—
क्या सोहागपुर में सड़क पर चलना अपराध बन चुका है?
और क्या प्रशासन की चुप्पी मौत की साझेदार नहीं है?







