सोहागपुर जनपद बिना सीईओ के ठप! विकास पर ताला, जनता त्रस्त — आखिर जिम्मेदार कौन?
सोहागपुर जनपद पंचायत बिना स्थायी सीईओ के ठप। विकास कार्य अटके, योजनाएं लंबित, जनसुनवाई प्रभावित। जनता ने प्रशासन से तत्काल नियुक्ति और जवाबदेही तय करने की मांग की।

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
सोहागपुर (जिला )।
जिले की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक तहसीलों में शुमार सोहागपुर आज प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। जनपद पंचायत में नियमित सीईओ की नियुक्ति न होने से विकास की पूरी व्यवस्था चरमराई हुई है।
सवाल यह है कि क्या सोहागपुर को प्रशासन ने “प्राथमिकता सूची” से बाहर कर दिया है?
प्रभारी राज में पंगु हुआ प्रशासन
जनपद पंचायत इस समय स्थायी नेतृत्व के बिना “प्रभारी मॉडल” पर चल रही है।
सूत्रों के अनुसार वर्तमान प्रभारी अधिकारी का मुख्य फोकस पिपरिया में है, जबकि सोहागपुर उनके लिए महज अतिरिक्त जिम्मेदारी है।
परिणाम साफ है:
- जनसुनवाई अनियमित
- अधिकारियों की अनुपस्थिति आम बात
- शिकायतकर्ता घंटों इंतजार के बाद निराश लौटते हैं
क्या यह ग्रामीण जनता के साथ सीधा अन्याय नहीं?
विकास कार्य फाइलों में दफन, ठेकेदार बेलगाम
सड़क, नाली, पंचायत भवन, पेयजल योजना, सीसी रोड, शौचालय निर्माण—
कई कार्य स्वीकृत होने के बावजूद जमीन पर नहीं उतर पा रहे।
जहां काम शुरू हुए, वहां गुणवत्ता संदिग्ध बताई जा रही है।
न मॉनिटरिंग, न निरीक्षण, न जवाबदेही।
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योजनाओं का हाल: लाभार्थी लाइन में, सिस्टम ऑफलाइन
प्रधानमंत्री आवास, ग्रामीण आजीविका, मनरेगा, पेंशन योजनाएं—
कई हितग्राही महीनों से स्वीकृति या भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।
नियमित समीक्षा बैठक न होने से:
- प्रगति रिपोर्ट लंबित
- भुगतान अटका
- डेटा अपडेट नहीं
क्या गरीबों का हक सिर्फ कागजों में सीमित रहेगा?
कर्मचारियों में ढिलाई, जवाबदेही शून्य
स्थायी नेतृत्व के अभाव में अधीनस्थ कर्मचारियों की कार्यशैली भी प्रभावित हुई है।
- फाइलें सप्ताहों तक लंबित
- निरीक्षण औपचारिकता
- शिकायतों पर कार्रवाई सुस्त
क्या जिला प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं दे रहा?
या फिर सोहागपुर को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है?
जनता का गुस्सा, राजनीतिक चुप्पी
स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज है—
“जब अन्य जनपदों में स्थायी सीईओ हैं, तो सोहागपुर क्यों उपेक्षित?”
क्या यह राजनीतिक उदासीनता है?
क्या सोहागपुर के विकास की कोई सुनवाई नहीं?
जनता अब सिर्फ नियुक्ति नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है।
कब तक चलेगा ‘अस्थायी शासन’?
प्रशासनिक पद रिक्त रहना सिर्फ एक औपचारिक कमी नहीं है—
यह पूरे क्षेत्र के विकास पर सीधा ब्रेक है।
यदि शीघ्र स्थायी सीईओ की नियुक्ति नहीं की गई, तो—
- योजनाएं और पिछड़ेंगी
- ठेकेदारों की मनमानी बढ़ेगी
- जनता का भरोसा पूरी तरह टूटेगा
अब फैसला प्रशासन को करना है
सोहागपुर की जनता अब खामोश नहीं है।
वह जवाब चाहती है—
कब आएगा स्थायी सीईओ?
कौन लेगा जिम्मेदारी?
और कब पटरी पर लौटेगा विकास?
यदि समय रहते निर्णय नहीं हुआ, तो यह मुद्दा जिला स्तर से आगे बढ़कर बड़ा जनआंदोलन भी बन सकता है।
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