खेतों में जुआ, थानों में सन्नाटा! पलोहा क्षेत्र में ‘बेगम–बादशाह’ का खुला खेल, आखिर किसका संरक्षण?
पलोहा थाना क्षेत्र के चिरिर्या और महंगवा फार्म हाउस में रात के समय खुलेआम 52 पत्तों का जुआ खेला जा रहा है। नरसिंहपुर पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और फोटो।

नरसिंहपुर।
पलोहा थाना क्षेत्र के चिरिर्या–महंगवा गांवों में स्थित कृषि फार्म हाउस के खेतों में रात होते ही 52 पत्तों का बेखौफ जुआ शुरू हो जाता है। लाखों रुपये के दांव लगाए जा रहे हैं और हैरानी की बात यह है कि यह सब जीते-जागते वीडियो और फोटो सबूतों के बावजूद धड़ल्ले से चल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, गाडरवारा थाना क्षेत्र के कामती पिठहरा से जुए का फंड पलोहा क्षेत्र तक पहुंच रहा है। यानी जुआ केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क के जरिए संचालित किया जा रहा है। सवाल यह है कि इतना बड़ा खेल बिना किसी संरक्षण के कैसे संभव है?
वीडियो वायरल, फिर भी कार्रवाई शून्य क्यों?
सोशल मीडिया पर मीडियाकर्मियों द्वारा वीडियो और फोटो पोस्ट किए जाने के बाद भी जुए का यह अड्डा लगातार संचालित है। इससे पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या सूचना के बावजूद कार्रवाई नहीं होना लापरवाही है या फिर मौन संरक्षण?
ऑपरेशन ‘ईगल क्लॉक’ पर भी सवाल
एक ओर जिले के पुलिस कप्तान द्वारा ऑपरेशन ईगल क्लॉक के जरिए अपराधों पर अंकुश लगाने की मुहिम चलाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर जिले के कुछ थानों की पुलिस कप्तान के आदेशों को भी ठेंगा दिखाती नजर आ रही है।
खेतों में खुलेआम जुआ, लाखों का लेन-देन और पुलिस की खामोशी—यह हालात आने वाले समय में गंभीर आपराधिक घटनाओं को न्योता दे सकते हैं।
चंद रुपयों में बिक गई वर्दी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि
आखिर चंद रुपयों के खातिर कुछ थानों के अफसर पुलिस महकमे की छवि को क्यों दांव पर लगा रहे हैं?
अगर समय रहते इस नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह जुआ माफिया पूरे जिले में अपराध की जड़ें और गहरी कर देगा।
जब जुआ बेखौफ हो जाए और कानून खामोश—तो समझिए संरक्षण ऊपर तक है!







