सालीचौका रेलवे फाटक पर शर्मनाक हालात, दो घंटे तक बंद रहा गेट, ठंड में तड़पती रही जनता
सालीचौका रेलवे फाटक पर दो घंटे तक गेट बंद रहने से सैकड़ों लोग ठंड में फंसे रहे। ओवरब्रिज स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हुआ, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही पर जनता में आक्रोश।

संवाददाता अवधेश चौकसे
सालीचौका।
सालीचौका रेलवे फाटक पर हालात बेहद शर्मनाक और चिंताजनक देखने को मिले। शाम करीब 4:30 बजे से 6 बजे तक रेलवे फाटक बंद रहने के कारण सैकड़ों लोग सड़क पर जाम में फंस गए। कड़ाके की ठंड में बच्चे रोते रहे, बुज़ुर्ग ठिठुरते रहे और मरीज जाम में तड़पते रहे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि पूरी तरह नदारद रहे।
ठंड, जाम और बेबसी—लेकिन सिस्टम गहरी नींद में
रेलवे फाटक बंद होने के दौरान न तो कोई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही प्रशासन की ओर से ट्रैफिक व्यवस्था संभालने का कोई प्रयास दिखाई दिया। लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की रोज़ की कहानी बन चुकी है।
ओवरब्रिज स्वीकृत, लेकिन ज़मीन पर काम शून्य
स्थानीय लोगों ने बताया कि सालीचौका रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज स्वीकृत हो चुका है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। मंत्री हों या सांसद, सभी के पास केवल आश्वासन और बहाने हैं, लेकिन समाधान किसी के पास नहीं है।
न अफसर पहुंचे, न नेताओं ने सवाल उठाए
सबसे हैरानी की बात यह रही कि इतने गंभीर हालात के बावजूद न कोई जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचा और न ही किसी ने रेलवे की मनमानी पर सवाल उठाया। जिन नेताओं के नाम पर चुनाव के समय वोट मांगे जाते हैं, उनके समर्थक तक इस मुद्दे पर चुप नजर आए।
जनता को मिल रही परेशानी नहीं, अपमान
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सालीचौका की जनता को मानो सवाल पूछने की सज़ा दी जा रही है। रोज़मर्रा की इस परेशानी ने अब अपमान का रूप ले लिया है। लोगों का साफ कहना है कि यदि यही हालात बने रहे, तो आने वाले समय में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब सवाल नहीं, सीधा आरोप
जनता का आरोप है कि यदि भविष्य में इस रेलवे फाटक पर किसी की जान जाती है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी सिस्टम और जनप्रतिनिधियों की होगी। अब लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है और वे जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।







