सालीचौका के निजी स्कूल बस चालकों पर गंभीर आरोप, पालकों से अभद्रता और अव्यवस्थित संचालन से बढ़ी चिंता
सालीचौका में निजी स्कूल बस चालकों पर पालकों से अभद्रता और लापरवाही के आरोप। बिना जांच और पहचान के चल रही बसों से बच्चों की सुरक्षा पर संकट।

संवाददाता अवधेश चौकसे
सालीचौका, नरसिंहपुर।
नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित निजी स्कूलों की बसों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पालकों का आरोप है कि कई स्कूल बस चालक न सिर्फ असावधानीपूर्वक वाहन चला रहे हैं, बल्कि बच्चों के माता-पिता से अभद्र भाषा और विवादपूर्ण व्यवहार भी कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन बसों की न तो नियमित जांच हो रही है और न ही स्टाफ की पहचान स्पष्ट है।
स्कूल बसों की नहीं हो रही जांच, बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजाना छोटे-छोटे बच्चों को लेकर चलने वाली स्कूल बसों का कोई फिटनेस चेक, लाइसेंस जांच या स्टाफ वेरिफिकेशन नहीं किया जा रहा है। ऐसे में बस चालक व स्टाफ मनमानी पर उतारू नजर आ रहे हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
ड्राइवर, क्लीनर और हेल्पर की नहीं पहचान
पालकों का कहना है कि कई स्कूल बसों में यह तक स्पष्ट नहीं होता कि ड्राइवर कौन है, क्लीनर कौन है और हेल्पर कौन।
- किसी के पास ड्रेस कोड या आईडी कार्ड नहीं
- बसों पर चालक का नाम, लाइसेंस नंबर या स्कूल का विवरण अंकित नहीं
- हादसे की स्थिति में स्टाफ बस छोड़कर भीड़ में गुम हो सकता है
10–15 किलोमीटर तक बच्चों को ले जाने वाली बसें, फिर भी लापरवाही
कई बसें बच्चों को 10 से 15 किलोमीटर दूर ग्रामीण क्षेत्रों तक लाने-ले जाने का काम कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो परिवहन विभाग की निगरानी दिख रही है और न ही स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय है।
पालकों से अभद्र व्यवहार के आरोप
पालकों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ बस चालक आए दिन माता-पिता और अभिभावकों से अभद्र दुर्व्यवहार करते हैं। बात-बात पर झगड़ा करना, ऊंची आवाज में बोलना और अशोभनीय भाषा का प्रयोग अब आम बात हो गई है।
बसों पर स्पष्ट जानकारी लिखे जाने की मांग
पालकों की मांग है कि—
- हर स्कूल बस में ड्राइवर, क्लीनर और हेल्पर का नाम, फोटो व मोबाइल नंबर लिखा जाए
- सभी स्टाफ के लिए ड्रेस कोड और आईडी कार्ड अनिवार्य हो
- बसों की नियमित जांच और फिटनेस प्रमाणन किया जाए
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
पालकों ने परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि निजी स्कूल बसों की तत्काल जांच अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से बच्चों की जान खतरे में न पड़े।







