मध्य प्रदेशशिक्षा/नौकरी

स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदयप्रताप सिंह ने किया ‘आदि शंकराचार्य गुरूकुलम्’ के नवीन भवन निर्माण का भूमि पूजन

सनातन शिक्षा के पुनर्जागरण की दिशा में गूंजे वैदिक मंत्र — “संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रभावना से ही शिक्षा पूर्ण होती है”

गाडरवारा (नरसिंहपुर)।
गाडरवारा क्षेत्र के समीपी ग्राम पतलोन में गुरुवार को आदि शंकराचार्य गुरूकुलम् के नवीन भवन निर्माण का भूमि पूजन एवं शिलान्यास समारोह बड़े ही वैदिक और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ।
समारोह में प्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदयप्रताप सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक आचार्यों द्वारा मंत्रोच्चारण और माँ सरस्वती के पूजन-अर्चन के साथ हुआ।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षाविद और नागरिक उपस्थित रहे।

वैदिक विधि से भूमिपूजन, गुरुकुल शिक्षा की परंपरा को मिला नया आयाम

भूमिपूजन समारोह में पूज्य गुरूदेव पंडित सोमेश परसाई जी ने कहा —

“आदि शंकराचार्य गुरूकुलम् केवल एक विद्यालय नहीं, बल्कि यह संस्कार, संस्कृति और चरित्र निर्माण का केंद्र बनेगा। यहाँ से ऐसे विद्यार्थी निकलेंगे जो जीवन में ज्ञान, आचरण और राष्ट्रधर्म का संगम स्थापित करेंगे।”

उन्होंने कहा कि इस संस्थान की स्थापना से बच्चों में सुसंस्कार, सनातन परंपरा और नैतिक मूल्यों की शिक्षा को नया बल मिलेगा।

मंत्री राव उदयप्रताप सिंह बोले — “शिक्षा ऐसी हो जो राष्ट्रवाद को जागृत करे”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदयप्रताप सिंह ने कहा —

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का यह संदेश है कि शिक्षा ऐसी हो जो राष्ट्रवाद और संस्कार दोनों को जागृत करे। ‘आदि शंकराचार्य गुरूकुलम्’ इस दिशा में एक आदर्श और अद्भुत संस्थान सिद्ध होगा।”

उन्होंने बताया कि यह विद्यालय 20 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित किया जा रहा है।
यहाँ 6वीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को संस्कृत सहित आधुनिक विषयों की शिक्षा दी जाएगी।
संस्थान में विज्ञान प्रयोगशाला, स्मार्ट क्लासरूम और निःशुल्क छात्रावास जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ होंगी।

मंत्री ने कहा —

“यहाँ हर वर्ग का बच्चा अध्ययन करेगा, जिससे समाज में समानता और संस्कार दोनों का समन्वय स्थापित होगा। नई शिक्षा नीति के सभी ध्येय इस संस्थान में पूर्ण रूप से लागू होंगे।”

कैलाश सोनी बोले — “सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना का दिवस”

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राज्यसभा के पूर्व सांसद कैलाश सोनी ने कहा —

“आज का यह भूमिपूजन केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना का शुभारंभ है। पतलोन ग्राम को यह गौरव प्राप्त हुआ है कि यहाँ प्रदेश के दो संस्कृत केंद्रों में से एक की स्थापना हो रही है।”

उन्होंने कहा कि गुरुकुल शिक्षा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जहाँ गुरु, शिष्य और संस्कार एक सूत्र में बंधे रहते हैं।

पूर्व विधायकों ने शिक्षा-संस्कार के समन्वय की दी सीख

पूर्व विधायक संजय शर्मा ने कहा कि संस्कृत भाषा का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैचारिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी है।
उन्होंने कहा —

“गुरूकुलम के निर्माण से गाडरवारा और आसपास के क्षेत्रों को नई दिशा मिलेगी।”

पूर्व विधायक साधना स्थापक ने कहा —

“शिक्षा, धर्म और संस्कार का समन्वय ही सच्चा गुरुकुल है। यहाँ के विद्यार्थी आने वाले समय में समाज के मार्गदर्शक बनेंगे।”

पूर्व विधायक नरेश पाठक ने कहा कि यह परियोजना मंत्री राव उदयप्रताप सिंह के प्रयासों से संभव हुई है और यह क्षेत्र के लिए एक बड़ी सौगात है।

प्रतिवेदन और आभार प्रदर्शन

महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान भोपाल के निदेशक रविंद्र कुमार सिंह ने संस्थान का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और परियोजना की रूपरेखा बताई।
कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन नगर पालिका अध्यक्ष शिवाकांत मिश्रा ने किया, जिन्होंने कहा कि इस गुरुकुल से बच्चों में संस्कार और मानवीय मूल्यों के आयाम स्थापित होंगे।

कार्यक्रम का संचालन शिक्षक मनीष शंकर तिवारी ने प्रभावशाली ढंग से किया।

मंच पर उपस्थित रहे अनेक गणमान्य

समारोह में कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा, संयुक्त संचालक अरुण इंगले, एसडीएम कलावती ब्यारे, डीईओ प्रतुल इंदुरख्या, डीपीसी मनीष चौकसे, सहायक संचालक सीमा डोंगरे, नीलम मरावी, बीआरसी डी.के. पटेल, संदीप स्थापक, महंत बालकदास, कमल नयन शास्त्री,
जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति काकोड़िया, वीरेंद्र फौजदार, मिनेन्द्र डागा, डॉ. योगेश कौरव, ऋचा स्थापक, धनंजय पटेल, राव संदीप सिंह, प्रियांक जैन, चंद्रकांत शर्मा, नरेश कौरव, अशोक भार्गव, राजेश पटेल, राजेश मोहन शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, नागरिक, शिक्षक और पत्रकार उपस्थित रहे।

गुरूकुलम बनेगा शिक्षा और संस्कार का संगम

आदि शंकराचार्य गुरूकुलम् भवन निर्माण से क्षेत्र में संस्कृत शिक्षा, भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के प्रसार को नया आयाम मिलेगा।
यहाँ विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक संस्कृति का संतुलित समन्वय सिखाया जाएगा, जिससे यह संस्थान एक आदर्श शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

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