प्रशासन की चुप्पी से टूटा सरपंच! दिया अल्टीमेटम! न्याय नहीं तो पंचायत भवन से नहीं निकलूंगा
दो साल से दबा जनप्रतिनिधि, सुनवाई के अभाव में पंचायत भवन में किया आत्मबंदी का ऐलान, सवालों के घेरे में कलेक्टर से लेकर जनपद तक की व्यवस्था

नरसिंहपुर / गाडरवारा।
नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा तहसील अंतर्गत जनपद पंचायत चीचली की ग्राम पंचायत सीरेगांव में मंगलवार को हालात उस वक्त विस्फोटक हो गए, जब ग्राम सरपंच महेंद्र कुशवाहा ने प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर पंचायत भवन के अंदर खुद को बंद कर लिया। यह कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं, बल्कि दो वर्षों से जारी संघर्ष, उपेक्षा और कथित प्रताड़ना का परिणाम बताया जा रहा है।
सरपंच का आरोप है कि वे पिछले दो सालों से अपने संवैधानिक अधिकारों के अनुसार पंचायत का कार्य नहीं कर पा रहे, क्योंकि जनपद पंचायत और प्रशासनिक अमला लगातार उनके कार्यों में बाधा डाल रहा है। निर्माण कार्य हों या विकास योजनाएं—हर स्तर पर उन्हें रोका गया।
दर्जनों आवेदन, लेकिन कार्रवाई शून्य
सरपंच महेंद्र कुशवाहा ने बताया कि उन्होंने कई बार लिखित शिकायतें जनपद पंचायत, एसडीएम कार्यालय, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित अधिकारियों को सौंपीं, लेकिन आज दिनांक तक किसी भी आवेदन पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पिछले मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में भी उन्होंने जिला कलेक्टर, जिला सीईओ, पुलिस अधीक्षक और एसडीएम को लिखित आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन नतीजा फिर वही—आश्वासन और खामोशी।
पंचायत भवन बना संघर्ष का मैदान
लगातार अनदेखी से आहत सरपंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
“जब तक मेरी समस्याओं का निराकरण नहीं होगा, मैं पंचायत भवन से बाहर नहीं निकलूंगा।”
सरपंच का यह कदम अब केवल व्यक्तिगत विरोध नहीं रह गया है, बल्कि पूरी पंचायत व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर सीधा सवाल बन चुका है।
वीडियो वायरल, पूरे जिले में हड़कंप
सरपंच का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन में खलबली मच गई। स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन सवाल उठा रहे हैं कि
👉 जब एक निर्वाचित सरपंच की ही कोई सुनवाई नहीं हो रही, तो आम ग्रामीणों की हालत क्या होगी?
बड़े सवाल, जिनसे प्रशासन नहीं बच सकता
- क्या जनपद पंचायत चीचली सरपंचों को जानबूझकर शक्तिहीन बना रही है?
- क्या विकास कार्यों में अघोषित रोक लगाकर दबाव की राजनीति की जा रही है?
- क्या जिला प्रशासन तब ही जागेगा, जब हालात बेकाबू हो जाएंगे?
जिम्मेदारी किसकी?
सरपंच का कहना है कि यदि समय रहते कलेक्टर स्वयं ग्राम सीरेगांव आकर मामले का समाधान नहीं करते, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि ग्रामीण लोकतंत्र की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक होती जा रही है।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं—
👉 क्या शासन-प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप करेगा, या फिर यह मामला और बड़ा टकराव बनेगा?







