मध्य प्रदेश

श्रद्धा, संस्कार और संरक्षण का संगम: वृक्ष मित्र संस्था ने 365वां सप्ताह पौधारोपण किया

सालीचौका में वृक्ष मित्र संस्था ने 365वां पौधारोपण सप्ताह शिव महापुराण कथा स्थल पर मनाया। श्रद्धा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम।

संवाददाता अवधेश चौकसे

सालीचौका | नरसिंहपुर।
पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने वाली वृक्ष मित्र संस्था, सालीचौका द्वारा आयोजित 365वां पौधारोपण सप्ताह अत्यंत पावन, भावनात्मक और प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुआ। यह विशेष आयोजन 11 जनवरी से 17 जनवरी तक चल रही श्री शिव महापुराण कथा के प्रथम दिवस पर, कथा स्थल मनोरथ गार्डन में आयोजित किया गया।

धार्मिक आस्था और प्रकृति प्रेम का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब वृक्ष मित्र संस्था के 365वें पौधारोपण संकल्प के अंतर्गत चयनित पवित्र बेल के पौधे का रोपण शिव महापुराण कथा के यजमान द्वारा विधिवत पूजन-अर्चन के साथ किया गया।

शिव कथा के मंच से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

इस पुण्य अवसर के साक्षी बने शिव महापुराण कथा वाचक परम सम्माननीय श्री सुरेश दुबे जी, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक भाव-विभोर एवं प्रेरणास्पद बना दिया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भगवान शिव प्रकृति के अधिपति हैं और वृक्षों का संरक्षण ही सच्ची शिव-भक्ति का प्रतीक है।

पौधारोपण के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं के चेहरों पर यह भाव स्पष्ट झलक रहा था कि शिव आराधना केवल कथा श्रवण तक सीमित नहीं, बल्कि सृष्टि के संरक्षण का संकल्प भी है।

“वृक्ष ही जीवन हैं” का संदेश गूंजा

वृक्ष मित्र संस्था द्वारा दिया गया संदेश —
“वृक्ष ही जीवन हैं और उनका संरक्षण ही सच्ची भक्ति है”
ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को गहराई से स्पर्श किया।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने न केवल पौधारोपण किया, बल्कि उस पौधे को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मानते हुए उसकी देखभाल और संरक्षण का संकल्प भी लिया।

हर-हर महादेव के जयघोष के साथ वातावरण हुआ गुंजायमान

पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” के जयघोष, भक्ति भाव और हरियाली के संकल्प से गूंज उठा। श्रद्धा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण का यह त्रिवेणी संगम उपस्थित जनसमूह के लिए अविस्मरणीय बन गया।

आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी पहल

निस्संदेह, वृक्ष मित्र संस्था का यह निरंतर प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण की एक अमूल्य विरासत सिद्ध होगा, जो समाज को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देता रहेगा।

 

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