सालीचौका-नरसिंहपुर: धान की नरवाई उठाने का सिलसिला जारी, आधुनिक मशीनें कम पड़ रहीं | किसान गेहूं बोनी की तैयारी में जुटे
सरकार पराली न जलाने की अपील तो कर रही है, पर संसाधनों की कमी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। पूरा अपडेट पढ़ें

अवधेश चौकसे, सालीचौका (नरसिंहपुर)। क्षेत्र में धान की नरवाई (पराली) उठाने की प्रक्रिया आधुनिक मशीनों के जरिए जारी है, लेकिन मशीनों की कमी के चलते किसानों को समय पर समाधान नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर गेहूं की बोनी का समय शुरू हो चुका है, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। प्रशासन लगातार पराली नहीं जलाने की अपील कर रहा है, लेकिन पर्याप्त संसाधन उपलब्ध न होना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
पराली उठाने के लिए केवल दो मशीनें सक्रिय
सालीचौका क्षेत्र में इस समय सिर्फ दो आधुनिक मशीनें ही धान की पराली उठा पा रही हैं।
- निजी संस्थान पराली से गिट्टा और रोल बनाकर खेतों से ले जा रहे हैं
- लेकिन खेतों की संख्या अधिक होने से मशीनें कम पड़ रही हैं
- समय पर पराली नहीं उठ पाने के कारण कुछ किसान मजबूरी में नरवाई जलाने को विवश हैं
कई किसान समय मिलते ही अपनी पराली मशीनों से उठवा भी रहे हैं और यह प्रक्रिया लगातार जारी है।
पराली प्रबंधन क्यों ज़रूरी है?
पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती है, हवा ज़हरीली बनती है और खेत की जैविक संरचना को नुकसान पहुंचता है। इसके विपरीत, आधुनिक तरीके से पराली उठाने और उपयोग में लेने से किसानों और उद्योगों को लाभ मिलता है।
पराली के प्रमुख उपयोग
1. खाद और जैव-चार (Biochar) निर्माण
- मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है
- जैविक खेती में सहायक
2. जैव-ईंधन
- पराली से बायोगैस और इथेनॉल तैयार होते हैं
- वाहनों और उद्योगों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल
3. औद्योगिक उपयोग
पराली से बनाए जाते हैं—
- कागज
- गत्ता
- ईंट
- डिस्पोजेबल बर्तन
क्षेत्र में पराली का उपयोग बिजली उत्पादन संयंत्र में होगा
सूत्रों के अनुसार, मोहपानी (गोटीटोरिया के पास) में एक बिजली उत्पादन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जहां पराली से काड़ी (फ्यूल स्टिक) बनाकर ईंधन के रूप में उपयोग किया जाएगा।
यह क्षेत्र में कृषि अवशेषों के उपयोग को बढ़ावा देगा और किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर भी दे सकता है।
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किसानों की मांग – मशीनें बढ़ें, विकल्प उपलब्ध हों
किसानों का कहना है कि:
- यदि पर्याप्त संख्या में पराली उठाने वाली मशीनें उपलब्ध कराई जाएं
- और सरकारी स्तर पर सहयोग बढ़े
तो नरवाई जलाने की समस्या पूरी तरह खत्म हो सकती है।








